पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२ कुंडलिया
पंछी को पछ¹ गया रहा इक नाम सहाई ॥
पलटू में जियतै मुवा नाम भरोसा पाय ।
करम धरम सब छाड़ि कै पड़े सरन में आय ॥
( १५५ )
पलटू सोवै मगन में साहिब चौकीदार ॥
साहिब चौकीदार मगन होइ सोवन लागे ।
दूनों पाँव पसार देखि कै दुस्मन भागे ॥
जाके सिर पर राम ताहि को बार न बाँकै ।
गाफिल में मैं रहौं आपनी आपुइ ताकै ॥
हम को नाहीं सोच सोच सब उन को भारी ।
छिन भरि परै न भोर² लेत हैं खबर हमारी ॥
लाज तजा जिन राम पर डारि दिहा सिर भार ।
पलटू सोवै मगन में साहिब चौकीदार ॥
( १५६ )
कोउ कितनौ चुगुली करै सुनै न बात³ हमार ॥
सुनै न बात हमार गये जब से सरनाई ।
सब ऐगुन करि माफ लिहिन मोकँह अपनाई ॥
करत फिरौं अन्याय काम ना क्रोध बिचारा ।
कैसेउ पूत कपूत पिता को आखिर प्यारा ।
लोभी लंपट चोर कुकरमी जातिन नीचा ।
अपने सरन की लाज जानि पद दीन्हेउ ऊँचा ॥
पलटू हम से राम से ऐसो भा ब्योहार ।
कोउ कितनौ चुगुली करै सुनै न बात हमार ॥
( १५७ )
जौन काछ कौ काढिये नाच नाचिये सोय ॥
नाच साचिये सोय तबै तौ सोभा पावै ।
(१) पंख । (२) भूल । (३) शिकायत ।