पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग - १ ६१
अपने अपने साथ करै सो आगे आवै ।
बाप कै करनी बाप पूत कै पूतै पावै ॥
जोरू कै जोरूहिं फलै खसम कै खसम कौ फलता ।
अपनी करनी सेती जीव सब पार उतरता ॥
नेकी बदी है संग और ना संगी कोई ।
देखौ बूझि बिचारि संग ये जैहैं दोई ॥
पलटू करनी और की नहीं और के माथ ।
अपनी अपनी करनी अपने अपने साथ ॥
( १५३ )
सरबंगी जो नाम कै रहनी सहित बिबेक ॥
रहनी सहित बिबेक एक करि सब कौ मानै ।
खान पियन में जुदा नहीं एकै में सानै ॥
लिये रहै मर्जाद तजै ना नेम अचारा ।
धर्म सनातन सहित असुभ सुभ करै बिचारा ॥
बोलै सब्द अघोर भजन अद्वैता अंगी ।
कारज निर्मल करै सोई पूरा सरबंगी ॥
पलट बाहर कुल धरम भीतर राखै एक ।
सरबंगी जो नाम कै रहनी सहित बिबेक ॥
॥ शरण और व्रत टेक) ॥
( १५४ )
करम धरम सब छाड़ि कै पड़े सरन में आय ॥
पड़े सरन में आय तजो बल बुधि चतुराई ।
जप तप नेम अचार नहीं जानौं कछु भाई ॥
पूजा ज्ञान न ध्यान तिलक नहिं देवै जानौं ।
जोग जुगत कछु नहीं नहीं तीरथ व्रत मानौं ॥
एक भरोसा पाय दिया सिर भार लराई १ ।
(१) गिरा दिया ।