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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 55

पलटू साहिब की बानी भाग— १ ४६
तब छूटै संसार जगत से प्रीति न कीजै।
लोभ मोह को जारि सत्य पद मारग लीजै॥
मारै भूख पियास जगत की करै न आसा।
काम क्रोध को जारि तजै सब भोग बिलासा॥
सदा रहै निवृत्त१ चित्त ना अंतै जावै।
मन को लेवै फेरि भजन में जाय लगावै॥
पलटू हिरन के कारने जड़भर्त लिया अवतार२।
बीज बासना को जरै तब छूटै संसार॥
( १२३ )
तो कहँ कोऊ कछु कहै कीजै अपनो काम॥
कीजै अपनो काम जगत को भूकन दीजै।
जाति बरन कुल खोय संतन को मारग लीजै॥
लोक बेद दे छोड़ि करै कोउ कितनौ हाँसी।
पाप पुन्न दोउ तजौं यही दोउ गर की फाँसी॥
करम न करिहौ एक भरम कोउ लाख दिखावै।
टरै न तेरी टेक कोटि ब्रह्मा समुझावै॥
पलट तनिक न छोड़िहौ जिउ के संगै नाम।
तो कहँ कोऊ कछु कहै कीजै अपनो काम॥
( १२४ )
इहाँ उहाँ कुछ है नहीं अपने मन का फेर॥
अपने मन का फेर सक्ति सिव दूसर नाहीं।
माया से है अंत३ तेहि से बोचे माहीं॥
जब मैं इहवाँ रहा सोच उहवाँ की भारी।
(१) निष्काम। (२) जड़ भरत राजा भरत को कहते हैं जिन्होंने राज-पाट
छोड़ कर बन में भगवत आराधन के लिये बास किया। एक हिरन से इनकी ऐसी गहरी
प्रीत हो गई थी कि उसी के वियोग में प्रान त्याग किया और उस बासना के कारन हिरन
का चोला पाया। (३) अलग।
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