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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 53

दसचौदह१ औतार काल के बसि में होई ॥
सुर नर मुनि सब देव मुए सब मौत अपानी ॥
देव पितर ससि भानु पवन नभ धरती पानी ॥
राजा रंक फकीर सूर और बीर करारी ।
साधु सती औ अगिन मुए जिन सब को जारी ॥
पलटू आगे मरि रहौ आखिर मरना मूल ।
राम कृस्न परसराम ने मरना किया कबूल ॥
( ११८ )
समुझावै सो भी मरै पलटू को पछिताय ॥
पलटू को पछिताय दिना दस सबै मुसाफिर ।
हिलि मिलि रहैं सराय भोर भये पंथ पड़ा सिर ॥
इक आवै इक जाय रहै ना पैंड़ा खाली ।
इक ओर काटो जाय दूसरा लावै माली ॥
बूढ़ा बारा ज्वान नहीं है कोई इस्थिर ।
सबै बटाऊ लोग काहे को पचिये मरि मरि ॥
मरने वाला मरि गया रोवै सो मरि जाय ।
समुझावै सो भी मरै पलटू को पछिताय ॥
( ११९ )
तुझे पराई क्या परी अपनी ओर निबेर ॥
अपनी ओर निबेर छोड़ि गुड़ बिष को खावै ।
कूँवाँ में तू परै और को राह बतावै ॥
औरन को उँजियार मसालची जाइ अँधेरे ।
त्यों ज्ञानी की बात मया से रहते घेरे ॥२
बेचत फिरैं कपूर आप तो खारी खावै ।
घर में लागी आग दौरि के घूर बुतावै ॥


(१) औतारों की संख्या चौबीस है। (२) माया में डूबा है और मुँह से ज्ञान
कथता है ।