पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग—१ ४३
सब का पोषन करै सभन की सेज बिछावै ।
सब को लेय सुताय, पास तब पिय के जावै ॥
सूतै पिय के पास सभन को राखै राजी ।
ऐसा भक्त जो होय ताहि की जीती बाजी ॥
पलटू बोलै मीठे बचन भजन में है लौलीन ।
पतिबरता को लच्छन सब से रहै अधीन ॥
( १०५ )
सोई सती सराहिये जरै पिया के साथ ॥
जरै पिया के साथ सोई है नारि सयानी ।
रहै चरन चित लाय एक से और न जानी ॥
जगत करै उपहास पिया का संग न छोड़ै ।
प्रेम की सेज बिछाय मेहर की चादर ओढ़ै ॥
ऐसी रहनी रहै तजै जो भोग बिलासा ।
मारै भूख पियास याद सँग चलती स्वासा ॥
रैन दिवस बेहोस पिया के रँग में राती ।
तन की सुधि है नहीं पिया सँग बोलत जाती ॥
पलटू गुरु परसाद से किया पिया को हाथ¹ ।
सोई सती सराहिये जरै पिया के साथ ॥
॥ उपदेश ॥
( १०६ )
हरि को दास कहाय के गुनह करै ना कोय ॥
गुनह करै ना कोय जेहि बिधि राखै रहिये ।
दुख सुख कैसउ पड़ै केहू से तनिक न कहिये ॥
तेरे मन में और करनवाला है औरै ।
तू ना करै खराब नाहक को निस दिन दौरै ॥
वा को कीजै याद जाहि की मारी टूटै ।
(१) बस में ।