पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग—१ ४१
काम क्रोध को मारि लोभ औ मोह हंकारा ।
लालच का सिर काटि बहै लोहू की धारा ॥
पलटू अठएँ लोक में अमल करै अवधूत ।
काया कोट छुड़ावै सोई है रजपूत ॥
( १०३ )
संत चढ़े जो मोह१ पर काया नगर मंझार ॥
काया नगर मंझार ज्ञान का तरकस बाँधे ।
दम की गोली साधि विस्वास बन्दूक है काँधे ॥
घोड़ा है संतोष छिमा का जीन बँधाई ।
बखतर पहिरे प्रेम गगन में लै दौड़ाई ॥
मुरचा पाँच पचीस बात में लिहा छुड़ाई ।
मन के बेरी२ डारि नगर में अदल चलाई ॥
पलटू सुरति कमान करि नाम निसाना मार ।
संत चढ़े जो मोह पर काया नगर मंझार ॥
( १०४ )
लागी गोली नाम की पलटू गया है लोट ॥
पलटू गया है लोट चोट सब्दन की लागी ।
रंजक दै कै ज्ञान दिया संतन ने दागी ॥
लोथ परी भहराय उठत हैं गिद्ध मसाना ।
भागे कादर३ देखि खेत सूरा ठहराना ॥
मारैं भरि भरि भेद छेद भा तन में तिल तिल ।
कड़खा४ दै ललकार खाल गिरि परी है छिल छिल ।
सतगुरु के मैदान में रही न तनिकौ ओट ।
लागी गोली नाम की पलटू गया है लोट ॥
(१) मोह दल पर चढ़ाई की । (२) बेड़ी । (३) कायर । (४) सूरता की महिमा
के शब्द ।
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