पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाधन नहीं बिबेक साधन सब कै के छूटा ।
लागी सहज समाधि सब्द ब्रह्मांड में फूटा ॥
खंडन तनिक न होय तेलवत१ लागी धारा ।
जोति निरन्तर बरै दसो दिसि भा उजियारा ॥
ज्ञान ध्यान सब छूटि छूटि संजम चतुराई ।
तन की सुधि गइ बिसरि अरूढ़२ अवस्था आई ॥
पलटू मैं भजनै भया रही न दूजी रेख ।
जोग जुगत आसन नहीं साधन नहीं बिबेक ॥
॥ ध्यान ॥
( ६१ )
कमठ दृष्टि जो लावई सो ध्यानी परमान ॥
सो ध्यानी परमान सुरति से अंडा सेवै ।
आप रहै जल माहिं सूखे में अंडा देवै ॥
जस पनिहारी कलस भरे मारग में आवै ।
कर छोड़े मुख बचन चित कलसा में लावै ॥
फनि मनि धरै उतारि आपु चरने को जावै ।
वह गाफिल ना परै सुरति मनि माहिं रहावै ॥
पलटू सब कारज करै सुरति रहै अलगान ।
कमठ दृष्टि जो लावई सो ध्यानी परमान ॥
( ६२ )
जैसे कामिनि के विषय कामी लावै ध्यान ॥
कामी लावै ध्यान रैन दिन चित्त न टारै ।
तन मन धन मर्याद कामिनि के ऊपर वारै ॥
लाख कोऊ जो कहै कहा ना तनिकौ मानै ।
बिन देखे ना रहै वाहि को सर्बस जानै ॥
लेय वाहि को नाम वाहि की करै बड़ाई ।
(१) तेल के समान । (२) ऊँची ।