पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२ कुंडलिया
( २६ )
फाका जिकर किनात१ ये तीनों बात जगोर ॥
तीनों बात जगोर खुसी की कफनी डारै ।
दिल को करै कुसाद२ आई भी रोजी टारै ॥
इबादत३ दिन रात याद में अपनी रहना ।
खुदी खूब को खोइ जनाजा४ जियतै करना ॥
सीकन्दर और गदा५ दोऊ कों एकै जानै ।
तब पावै टुक नसा फना६ का प्याला छानै ॥
पलटू मस्त जो हाल में तिसका नाम फकीर ।
फाका जिकर किनात ये तीनों बात जगोर ॥
( ३० )
कबही फाका फकर है कबही लाख करोर ॥
कबही लाख करोर गमी सादी कछु नाहीं ।
ज्यों खाली त्यों भरा सबुर है मन के माहीं ॥
कबही फूलन सेज हाथी की है असवारी ।
कबही सोवै भुईं पियादे मँजिल गुजारी ॥
कबही मलमल जरी ओढ़ते साल दुसाला ।
कबही तांपै आग ओढ़ि रहते मृगछाला ॥
पलटू वह यह एक है परालब्ध नहिं जोर ।
कबही फाका फकर है कबही लाख करोर ॥
( ३१ )
साध महातम बड़ा है जैसो हरि यस होय ॥
जैसो हरि यस होय ताहि को गरहन कीजै ।
तन मन धन सब वारि चरन पर तेकरे दीजै ॥
नाम से उत्पति राम संत अनामी७ समाने ।
( १ ) उपास, सुमिरन और संतोष । ( २ ) उदार । ( ३ ) आराधना । ( ४ )
रथी या टिकठी मुरदे के ले जाने की । ( ५ ) सिकन्दर बादशाह और भिखारी । ( ६ )
मौत । ( ७) अनामी पद में ।