पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग—१ ७
दीपक बारा नाम का महल भया उजियार ॥
( १६ )
नाम के रे परताप से भये आन कै आन ॥
भये आन कै आन बड़े के पाँव पड़ूँगा ।
का बपुरा तिल तेल फूल संग बिकता महँगा ॥
संत हैं बड़े दयाल आप सम मो को कीन्हा ।
जैसे भृङ्गी कीट सिच्छा कुछ ऐसी दीन्हा ॥
राई किहा सुमेर अजया गजराज चढ़ाई ।
तुलसी होइगा रेंड सरन की पैज बड़ाई ॥
पलटू जातिन नीच मैं सब औगुन की खान ।
नाम के रे परताप से भये आन कै आन ॥
( १७ )
देखौ नाम प्रताप से सिला तिरै¹ जल बीच ॥
सिला तिरै जल बीच सेत² में कटक³ उतारी ।
नामहिं के परताप बानरन⁴ लंका जारी ॥
नामहिं के परताप जहर मीरा ने खाई ।
नामहिं के परताप बालक पहलाद बचाई ॥
पलट हरि जस ना सुनै ता को कहिये नीच ।
देखौ नाम प्रताप से सिला तिरै जल बीच ॥
( १८ )
हाथी घोड़ा खाक है कहै सुनै सो खाक ॥
कहै सुनै सो खाक खाक है मुलुक खजाना ।
जोरू बेटा खाक खाक जो साचै माना ॥
महल अटारी खाक खाक है बाग बगैचा ।
सेत सपेदी खाक खाक है हुक्का नैचा ॥
साल दुसाला खाक खाक मोतिन कै माला ।
नौबतखाना खाक खाक है ससुरा साला ॥
(१) तैरती है। (२) पुल । (३) फौज, सेना । (४) बन्दरों ने ।