पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकुंडलिया
सो वह प्याला पियै सीस को धरै उतारी ॥
आँख मूँदि कै पियै जियन की आसा त्यागै ।
फिरि वह होवै अमर मुए पर उठि कै जागै ॥
हरि से वे हैं बड़े पियो जिन हरि रस जाई ।
ब्रह्मा बिस्नु महेस पियत कै रहे डेराई ॥
पलटू मेरे बचन को ले जिज्ञासू मान ।
मीठ बहुत सतनाम है पियत निकारै जान ॥
( १४ )
संत सनेही नाम है नाम सनेही संत ।
नाम सनेही संत नाम को वही मिलावैं ॥
वे हैं वाकिफकार मिलन की राह बतावैं ।
जप तप तीरथ बरत करै बहुतेरा कोई ॥
बिना वसीला संत नाम से भेंट न होई ।
कोटिन करै उपाय भटक सगरौ१ से आवै ॥
संत दुवारे जाय नाम को घर तब पावै ।
पलटू यह है प्रान पर२ आदि सेती औ अंत ॥
संत सनेही नाम है नाम सनेही संत ।
( १५ )
दीपक बारा नाम का महल भया उजियार ॥
महल भया उजियार नाम का तेज बिराजा ।
सब्द किया परकास मानसर३ ऊपर छाजा ॥
दसो दिसा भई सुद्ध बुद्ध भई निर्मल साची ।
छुटी कुमति की गाँठि सुमति परगट होय नाची ॥
होत छतीसो राग दाग तिर्गुन का छूटा ।
पूरन प्रगटे भाग करम का कलसा फूटा ॥
पलटू अँधियारी मिटी बाती दीन्ही टार ॥
(१) सब । (२) परे । (३) नाम पारब्रह्मांड के तालाब का ।