सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

पृष्ठ 110, कुल 116 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 110

१०४ कुंडलिया
( २५९ )
दूसर जनमत मारिये की बरु रहिये बाँझ ॥
दूसर जनमत मारिये की बरु रहिये बाँझ ॥
की बरु रहिये बाँझ कोख में दाग लगावै ।
जामै१ पेड़ मदार ताहि में क्या फल आवै ॥
जो जनमै हरि भक्त जगत में सोभा पावै ।
कुल में फूलै कमल पुत्रवंती कहवावै ॥
कौसिल्या देवकी बड़ी अब कहिये सोई ।
हरि जन में हरि रहै भार जिन लीन्हा दोई ॥
पलटू सोई पुत्रवती भक्त रहै जेहि माँझ२ ।
दूसर जनमत मारिये की बरु रहिये बाँझ ॥
( २६० )
आगि लगो वहि देस में जहँवाँ राजा चोर ॥
जहँवाँ राजा चोर प्रजा कैसे सुख पावै ।
पाँच पचीस लगाइ रैनि सदा मुसावै ॥
आठौ पहर उपाधि रहै नाना बिधि लागी ।
काम क्रोध हंकार सकै ना रैयत भागी ॥
लोभ मोह की दिनै३ गले बिच नावै फाँसी ।
लोक लाज मरजाद चलावै तिरगुन गाँसी ॥
पलटू रैयत क्या करै चलै न एकौ जोर ।
आगि लगो वहि देस में जहँवाँ राजा चोर ॥
( २६१ )
यह अचरज हम देखिया कानी काजर देइ ॥
कानी काजर देइ खसम के मन ना मानै ।
निसि दिन करै सिंगार भेद या बिरला जानै ॥
नख सिख खोटी मोटि पहिरि कै बैठो गहना ।
(१) उगै । (२) उदर में । (३) दिन दहाड़े ।