पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 109, कुल 116 में से
संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग—१ १०३
हँसिया को है ब्याह गीत खुरपा कै गावा ॥
देय महावर आँख गोड़ में काजर लावै ।
ऐसी भोली नारि ताहि कौ को समुझावै ॥
पलटू वाहि अबूझ है अंत खायगी मार ।
हींग लगाइस भात में भूल गई है नार ॥
( २५७ )
घरिया औटै तत्व की परै नाम टकसार ॥
पड़ै नाम टकसार द्वादस सन१ बहुत करकरा ।
ज्ञान चोख से चोख रैनि दिन पड़ै धरधरा ॥
चौकस करै बिबेक सरन जो जौ भरि आवै ॥
ऐसा सिक्का होय कोई ना बट्टा लावै ॥
देवै ठासा बेहद परै सनवाती सीका२ ।
चारि खूँट में चलै जियत इक होय रती का ॥
पलटू बानी परा कहँ लेहै सन्त बिचार ।
घरिया ओटै तत्व की परै नाम टकसार ॥
( २५८ )
सतगुरु के परताप से पकरा पाँचो चोर ॥
पकरा पाँचो चोर नगर में अदल चलाया ।
तिगुंन दिया निकारि आनि कै भक्ति बसाया ॥
लोभ मोह को पकरि ताहि की गरदन मारी ।
तृस्ना औ हंकार पेट दियो इनको फारी ॥
दुर्मति दई निकारि सुमति का चाबुक दीन्हा ।
चढ़े सिपाही संत अमल कायागढ़ कीन्हा ॥
पलटू संजम मैं किया परा मुलुक में सोर ।
सतगुरु के परताप से पकरा पाँचो चोर ॥
(१) सन १२ के सिक्के की चाँदी सोना बहुत खरा मशहूर है। (२) सिक्का।