पाकदर्पण (राजा नल प्रणीत - इन्द्रदेव त्रिपाठी माधुरी हिन्दी व्याख्या सहित)
Pakadarpana of Raja Nala with Madhuri Hindi Commentary
राजा नल (टीकाकार: पं. इन्द्रदेव त्रिपाठी) द्वारा
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आगे चलकर दूध, दही, घी तक्र आदि का गुण सहित वर्णन मिलता है।
व्यवहारोपयोगी विविध शाकों का वर्णन है, तथा उनको बनाने के विभिन्न प्रकारों
का दिग्दर्शन कराया गया है। विचित्र शाक का विशिष्ट प्रतिपादन तो इनकी
विशेष बुद्धि का विशिष्ट परिचय है। भक्ष्य, भोज्य, चोष्य, लेह्य, पेय आदि पञ्च-
विध भोजन को कैसे बनाया जाता है, उसके कौन-कौन उपकरण हैं तथा
उनके क्या गुण हैं यह सब ग्रन्थकार की अद्भुत देन है। फलों से जितने भी
प्रकार बन सकते हैं उनका विस्तार पूर्वक प्रयोगात्मक वर्णन मिलता है।
इस ग्रन्थ को ग्यारह प्रकरणों में बाँटा गया है। सब से बड़ा प्रकरण पहला
है। जिसमें पाक का विवेचन विस्तारपूर्वक किया गया है। दाल के भेद, घी के
भेद, व्यञ्जन भेद, मांसपाक प्रकार आदि प्रथम प्रकारण के अवान्तर भेद हैं।
द्वितीय प्रकरण में ऋतु वर्णन प्रतिदिन ऋतुओं के परिभ्रमण का क्रम एवं उनकी
उपयोगिता, तृतीय प्रकरण में विभिन्न भक्ष्य भोज्यादि का वर्णन, चतुर्थ में पायस
के विभिन्न प्रकार एवं गुण, पञ्च