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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 97

६६ पद्मावत।
अहो महा बिश्वासी देवा। कित मैं आय कीन्ह तू सेवा ॥
आपन नाव चढ़ै जो देइ । सो तो पार उतारै खेइ ॥
सुफलजानि पग ढेक्यों तोरा। सुआँ का सेमर तू भा मोरा ॥
पाहन चढ़ि जो चहिभा पारा । सो ऐसे बूडै मँझधारा ॥
पाहनै सेवो कहां पसीजा । जनमत पलवै जो जलभीजा ॥
बावर सोई सुपाहन पूजा । सकत की मार लई शिरदूजा ॥
काहे न पूजै सोई निराशाँ । मुँये जीत मन जाकर आशा ॥
दो० सिंह तरैंदा जेहिं गही, पार भये ते साथ।
तेपै बूडै बारहिं, भेंड पूंछ जेहि हाथ ॥
देव कहा सुनि बौरे राजा। देवहि अगमने मारा गाजौ ॥
जो पहिले अपने शिर परी । सो का काहुक धरधरै करी ॥
पद्मावत राजा की बौरी। आय सखिन सो मंडफ उघारी ॥
जैस चांद गोहने सब तारा। पख्यो भुलाय देख उजियारा ॥
चमके दर्शन बीजे की नाई। नयने चक्र चमकात भवाँई ॥
हों तेहि दीप पतङ्ग होय परा । जिवजिमि काढ स्वर्ग लै अचरा ॥
फेर न जाना वहँ का भई । वहँ कैलास कि कहें अपैंसई ॥
दो० अबहूँ मरों निसौसी, हिये न आवै सांस ।
रुगिया की को चालै, बैदहि जहां उपास ॥
अनहों दोष देउँ का काहू । सुनिके कयों मर्यो नहिं ताहू ॥
हितू पियारा मीत बिछोई । साथ न लाग आपका सोई ॥
पैर १ तोता २ पत्थर ३-४ खिदमत ५ मुश्किल समय का बोझ कौन
दूसरा उठाता है ६ नाउम्मेद ७ मरना ८ शेर ६ पकड़ना १० पहिले ११
विजुली १२-१७ दस्तगीरी १३ लड़की १४ साथ १५ दांत १६ आंख १८
घूमना १६ जिसतरह २० आसमान २१ छिपना २२ वेदम २३ दिल २४
बदन २५ मेहरबानी २६ दोस्त २७-२८ जुदाई २६ ॥