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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 89, कुल 318 में से

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पृष्ठ 89

यहाँ पृष्ठ पर दिए गए पाठ का देवनागरी लिप्यंतरण प्रस्तुत है:

८८ पद्मावत।
भई अहा पद्मावत चली। छत्तिसकुंरि भइ गोहनें भली ॥
भई गौरि संग पहिर पटोरा। ब्रह्मनिआय सहसें सँगैं मोरा ॥
अग्रवारि गजगवर्न करेई। वैसि पांव हंस गत देई ॥
चन्देलिनि ठमकहिं पगैं ढारा। चल चौहान होय झनकारा ॥
चली सुनारि सुहांग सुहाती। औ कलवारि प्रेममधुमाती ॥
बानिनि चली सिंदुर दियेमांग। कैथिनिचली समाय न आंगा ॥
पटयनि पहिरि सुरंग तन चोला। औ बरइन मुखखात तमोला ॥
दो० चली पवनें सँग गोहनें, फूल डार लिये हाथ।
विश्वनाथ की पूजा, पद्मावत के साथ ॥
ठाठेरिन बहु ठाठर कीन्हा। चली अहीरिन कांजर दीन्हा ॥
गूजरि चली गोरस की माती। बढ़यनि चली भागकी ताती ॥
चली लुहारिन बांके नयना। भाटिन चली मधुरै अतिवयनों॥
गन्धिन चली सुगन्ध लगाये। छीपिन चली सो चीर रँगाये ॥
रँगरेजिन बहु रँगती सारी। चली युक्ति सो नाउनि वारी ॥
मालिनि चली हार लिये गांथे। तेलिनि चली फुलायलमाथे ॥
किये श्रृंगार बहु वेश्या चली। जहँलग मूँदी बिकेंसी कली ॥
दो० नटनी डोमिनि दारिन, सहनायन परकार।
निरततें नांदे बिनोदें सों, विहँसत खेलत नार ॥
कमल सुभाष चली फुलवारी। फर फूलन की इच्छा वारी ॥
आप आप महँ करहिं जोहारू। यह बसन्त सबकहँ त्योहारू ॥
चही मनोरों झूमक होई। फर औ फूल लियो सब कोई ॥
छत्तीस क़ौम १ साथ २-१९ गौरब्राह्मण ३ हज़ार ४ चंदन ५-६ हाथी की
चाल ६ क़दम ७ शराब ८ हवा १० ईश्वर १२ मीठी, १३ चोल १४ लाल १५
खिलना १६ नाचना १७ गाना १८ ख़ुशी १६ साहेब सलामत २० रसमगाने
औ बजाने की २१ ॥