पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 88, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंयोगीयोग जो इमि सहै, सिद्ध समापत तास ॥ (१)
खण्डसोलहवां बसन्तखण्ड ॥
दई दई कर सुरत गँवाई । श्रीपञ्चमी पूजि तब आई ॥
भयो हुलास नवल ऋतुमाहां । क्षण न सुहाय धूप औ छाहां ॥
पद्मावत सब सखी हँकारी । जानवन्त सिंहलकी बारी ॥
आज बसन्त नवल ऋतुराजा । पंचम होय जगत सबसाजा ॥
नवल श्रृँगार बनाहंत कीन्हा । शीशे परोसहिं सैंदुर दीन्हा ॥
बिकँसे कमल फूल बहुवासा । भँवरआय लुब्धे चहुँ पासा ॥
पियर पात दुख भरे निपौते । सुख पलहा उपजी होय शैते ॥
दो० अवधि आय सो पूजे, जो इच्छा मन कीन्ह ।
चलहु देवमढ़ गोहनें, चहो सो पूजा दीन्ह ॥
फिरे आन ऋतु बाजन बाजे । औ श्रृंगार बारहि सब साजे ॥
कमल करी पद्मावत रानी । होय मालति जानौ बिगसानी ॥
तारामन्दे पहिर भल चोला । भरी शीश संवनखत अमोला ॥
सखी कुमोद सहंसदश सङ्गा । सबै सुगन्ध चढ़ाये अङ्गा ॥
सब राजा रायनकी बारी । बरन बरन पहिरैं सब सारी ॥
सबै स्वरूप पद्मिनी जाती । पान फूल सैंदुर सब राती ॥
करें कलोलें सुरङ्ग रँगीली । औ चोवा चन्दन सब खेली ॥
दो० चहुँदिशि रही वासना, फुलवारी अस फूल ।
वे बसन्त सों फूली, गा बसन्त वहि भूल ॥
इसतरह १ कामिल २ खुशी ३ नया ४-६ भुलाना ५ जहांतक ६ लड़की
७-२०-२७ दुनियां ८ पेड़ १० शिर ११-२३ दाख १२ खिलना १३-२१
लपटना १४ झरना १५ पैदा १६ लाल १७-२६ हद १८ साथ १९ नाम
कपड़ा २२ कोफावेली २४ हज़ार २५ बदन २६ रंगवरंग २८ खुशी ३० चारों
तरफ ३१ ॥