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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 85

८४ - पद्मावत ।
लंक्षन बतीसों कुल निरमलाँ १। बरणिँ २ न जायरूप औ कला ॥
वेहौं लीन्हैं ३ अहा अस भागू । चाहै सोने ४ मिला सुहागू ॥
सुनग देख इच्छा भइ मोरी । है यह रतने ५ पदारथ जोरी ॥
है शशिर ६ योग यही पै भानूँ । तहँ तुम्हार मैं कीन्ह बखानूँ ७ ॥
दो० कहां रतन रतनागढ़, कंचनं ८ कहां सुमेर ।
दैव जो जोरी दुहुँलिखी, मिली सो कौनहि फेर ॥
सुनिके विरह चिनग वह परी । रतन पाव जो कंचनर्करी ९ ॥
कठिनें १० प्रेम बिरहा दुख भारी । राज छांड़िभा योगि भिखारी ॥
मालति लाग भँवर जस होय । होयबावरे ११ निसरा बुधिखोय ॥
कहेसि पतंग होय रस लेऊं । सिंहलद्वीप जाय पगँ १२ देऊं ॥
पुनि वह कोउ न छांड़ अकेला । सोरहसहँसे १३ कुँवर भयचेला ॥
और गिनै को संग संहँई १४ । महादेव मँढ़ मेला जाई ॥
सूर्य पुरुषै १५ दरशन की ताई । चिंतवे चन्द्र चकोर की नाई ॥
दो० तुम बौरी १६ रस योग जेहिं, कमलहि जस अरघान ।
तस सूरज परकाशैँ १७ कै, भँवर मिलायो आन ॥
हीरामने १८ जो कही यहि बाता । सुनिके रतन पदारथ राता ॥
जैसे सूर्य्य देख है ओपाँ १९ । तसभा विरह कामदल कोपाँ २० ॥
सुनिके योगी केरे बखानूँ २१ । पद्मावत मनभा अभिमानूँ २२ ॥
कंचनकँरी २३ न कांचहि लोभा । जो नगजड़े होय तस शोभा ॥
कंचन जो कसिये कै ताता । तब जाने वह पीतेँ २४ कि रातौँ २५ ॥

  • पाक साफ़ १ बयान करना २-७ उसका मोल लियाहुआ ३ जवाहर
    लाल ४ चांद ५ सूर्य ६ सोना ८ सोने की अंगूठी ६-२३ मुश्किल १० दीवाना
    ११ क़दम १२ हज़ार १३ फ़ौज १४ मर्द १५ लड़की १६ उजियारा १७ नाम
    तोता १८ उदय होना १९ गुस्सा करना २० तारीफ़ २१ ग़रूर २२ पीला २४
    लाल २५ ॥