सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 84, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 84

॥ पद्मावत ॥ ८३
रही रोय जब पद्मिनि रानी । हँसि पूँछहिं सब सखी सयानी ॥
मिले रहस भा चाहे दूना । कित रोई जो मिले बिछोना ॥
तेहिकें उतरै पद्मावत कहा । बिछुरन दुख जो हियैं भर रहा ॥
मिलत हिये आयै सुख भरा । वह दुख नयननीर होय ढुरा ॥
दो० बिछुरंता जब भेटे, सो जाने जेहि नेहँ ।
सुख सुहेला उगवै, दुःखझरै जिमि मेहँ ॥
खण्ड पन्द्रहवां मुलाकात खण्ड
पद्मावत औ हीरामन ॥
पुनि रानी हँसि कुशलै पूँछा । कितं गे वनहिकै पिंजर ढूँछा ॥
रानी तुम युगयुग सुखपाटूँ । छाजै न पंखी पिंजर ठाटू ॥
जो भा पंख कहां थिरें रहना । चाहे उड़ा पंख जो डहनों ॥
पिंजर महँ जो परेवां घेरा । आय मँजोरै कीन्ह तहँ फेरा ॥
दिवसकें आय हाथ पै मेला । तेहि डर बनोबासकहँ खेलौं ॥
तहां जाय ब्याध नर सांघा । छूट न जाय मीच कर बांधा ॥
वें घर बेचा ब्राह्मण हाथा । जम्बूद्वीप गयौं तेहि साथा ॥
दो० तहां चित्र चित्तौरगढ़, चित्रसेन कर राज ।
टीकों दीन्ह पुत्रकहँ, आप लीन्ह शिवसाँजै ॥
बैठि जो राज पितौँ कर ठाँऊँ । राजा रतनसेन तेहि नाऊँ ॥
का वरँणों धन देश दुवारा । जहँ असनगउपजौं उजियारा ॥
धन माता औ पिता बखाना । जेहिके वंश अंशै असआना ॥
खुश १ जबाब २ दिल ३-४ आंसू ५ मुहब्बत ६ जिस तरह ७ बादल
८ खैरियत ६ कहां १० तख्त ११ सोहना १२ जानवर परिन्द १३-१६ कायम
१४ बाजू १५ बिल्ली १७ एक दिन १८ जाना १६ तसवीर २० राजतिलक २१
मरना २२ बाप २३ जगह २४ तारीफ़ २५ पैदाहोना २६ अक़बालवाला २७ ॥