पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ७५
खण्ड तेरहवां सातसमुद्रपार भाव
सिंहलदीपखण्ड ॥
पूँछा राजैं कहु गुर सुवा । नजनों आज कहां दिन उवा ॥
पवनैं बास शीतलैं लै आवा । क्या दहतेँ चंदन जनुलावा ॥
कबहुँन ऐसोजुड़ान शरीँरू। पड़ा अगिनमहँ जानहु नीरू ॥
निकसत आव किरन रबि रेखा । तिमिरँ गई निरमलं जगँ देखा
उठे मेघ जस जानहु आगे । चमकै बीजै गगनैं परलागे ॥
तेहिऊपर जनु शशि परकासौँ। औसगत्रीवहँ भयोनिरासा
और नखतचहुँदिशँ उनियारी । ठावहिंठांवैँ दीप असबारी ॥
दो० और दखिनदिश नेरे, कंचन मेरुँ दिखाउ ।
जैसे बसंतऋतु आवे, तैसिबास जगँ आउ ॥
तुइँ राजा जस विक्रमँ आदी । तुइँ हरिचंद बैनैँ सतबॉदी ॥
गोपिचंदैँ तुइँ जीता योगा । औ भरथैरीन पूज बियोगौँ ॥
गोरखँ सिद्ध दीन्ह तुहि हाथू । तारी गुरु मछन्दरै नाथू ॥
जीति प्रेम तुइँ भूमिँ अकांशू । दृष्टि परा सिंहल कैलाशू ॥
वै जो मेघ गढ़ेँ लाग अकासा । बजैरी कटी कोटेँ बहुँपासा ॥
और नखत वेहिके चहुँपासा । सेब रानिन की अहैं उड़ासौँ ॥
तेहिपरशशि जोगग्रहत्रहिं भरा राजमंदिर सोने नगजरा ॥
दो० गगनैं सरोवर सहस कमल, कुमुँद तराइँ पास ।
हवा १ ठंढी २ बदन ३-५ जलना ४ पानी ६ सूर्य ७ अँधियारा ८
पाक साफ़ ६ दुनियां १०-२० बिजुली ११ आसमान १२-३७ चांद १३-३५
रोशनी १४ छोटे नखत १५-३६ चारों तरफ १६ हरजगह १७ सोना १८ नाम
पहाड़ १६ राजाविक्रमाजीत २१ नाम राजा २२-२४-२५ सच बोलनेवाला २३
दुखी २६ नाम योगी २७-२८ ज़मीन २६ निगाह ३० क़िला ३१-३३ बुर्ज ३२
महल ३४ तालाव ३८ हज़ार ३६ कोकावेली ४० नखत ४१ ॥