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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 75

७४ पद्मावत ।
दो० कान्हेँ समुद्गधस लीन्हेँसि, भा पीछे सब कोय ।
कोई काहू न सँभारे, आपन आपन होय ॥
कोई बोहितैं जस पवनैं उड़ाहीं । कोई चमकबीजैं परजाहीं ॥
कोई भल जस धाव तुषारूँ । कोई जैस बैल गरियारूँ ॥
कोई हरूँ जानि रथ हांका । कोई गरु पहाड़भा थाका ॥
कोई रेंगहिं जानहु चांटी । कोई टूटि होहिं सर माटी ॥
कोई खाय पवनैं कर झोला । कोई गिरहिं पात ज्यों डोला ॥
कोई परहिं भँवर जल माहीं । फिरत रहहिं कोई दियेन बाहीं ॥
राजा कर भा अगमनैं खेवा । खेवकै आगे सुवा परेवा ॥
दो० कोई दिन मिला सबेरैं, कोई आवा पछरात ।
जाकर हुत जस साजूँ, सो उतरा तेहिभांत ॥
सतैं समुद्र मानसरेँ आये । सत जो कीन्ह सहेंसैं सिधिपाये ॥
देखि मानसरेँ रूप सुहावा । हियेँ हुलासैं पुरइनैं होयछावा ॥
गा अँधियार रयनैं मसि छूटी । भा भिनसार किरनरवि फूटी ॥
अस्त अस्तैं सबसाथी बोले । अन्ध जो अहे नयनैं विधि खोले ॥
कमल बिकलैं तसबिहँसीं देहीं । भँवर दरश होयहोयरसलेहीं ॥
हँसहिं हंस औ करहिं कुरेरौं । चुनहिं रतनैं मुक्ताहलँ हेरा ॥
जो अस आवसाधि तपयोगू । पूजी आस मानरस भोगू ॥
दो० भँवर जो मूँसौं मानसरेँ, लीन्ह कमलरस आय ।
घुनजो हियावैं न कैसका, झूर काठ तस खाय ॥
श्रीकृष्णचन्द्रजी १ नांव २ हवा ३-६ बिजुली ४ घोड़ा ५ भारी ६ हलकी
७ चूंटी ८ आगे १० मल्लाह ११ सामान १२ नाम तालाव जिसमें हंस
रहते हैं १३-१५ हज़ारतरह की आराम १४ दिल १६ खुश १७ कमल १८
रात १६ सियाही २० सूर्य २१ घाहवाह २२ आंख २३ ईश्वर २४ खिलना २५-
२६ कुलेलकरना २७ जवाहर जिसकी पैदाइश खानिसे होती है २८ मोती २६
हिम्मत बांधना ३० नामतालाव ३१ दिलेरी करना ३२ ॥