पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७० पद्मावत ।
राजैं कहा कीन्ह मो प्रेमा । जहां प्रेम तहँ कुशल १ क्षेमा ॥
तुम खेवो जो खेवहि पारहिं । जैसे आप तरहिं मोहिं तारहिं ॥
मोहिंकुशल २ कर सोच न ओता । कुशल ३ होत जो जन्म न होता ॥
धर्ती ४ स्वर्ग ५ जाँट पर दोऊ । जो यहिविच जिव राखनकोऊ ॥
हौं अब कुशल एक पै माँगौं । प्रेमपंथ सतबांधि न खाँगौं ॥
जो सतहिये ६ तो पंथहि १० दिया । समुद्रन डरे देखि मरजिया ॥
तहँलग हेरौं ११ समुद्र ढिंढोरौं । जहँलग रतन १२ पदारथ जोरौं ॥
दो० सप्तपातालै १३ खोजके, काढौं वेद गैरंथ ।
सातसमुद्र चढ़ि धावौं, पद्मावत जेहि पंथै १५ ॥
खण्ड बारहवां सात समुद्र खण्ड ॥
सायर १६ तरे हिये १७ सतपूरा । जो जीसंतें १८ कायर १९ पुनि सूरा ॥
तहँ सब बोहितं २० पूर चलाई । जहँ सतपवनै २१ पंख जनुलाई ॥
सतसाँथी सतगुरु हम वारू । सत गहीले लावे पारू ॥
सती नाक सबे आगू पाछू । जहँ जहँ मगर मच्छ औ काछू ॥
उठे लहर जनु उठे पहारा । चढ़े स्वर्ग औ परै पतारा ॥
डोलहिं बोहितं २२ लहरें खाई । सहँसै कोस इक पलमहँ जाई ॥
राजैं सो सत हिरदयँ बांधा । जेहि सत टेके करगुर कांधा ॥
दो० खारिसमुद्र सब नांघा, आये समुद्र जहँ खीर २७ ।
मिले समुद्र वै सातों, बेहरेँ बेहर नीरेँ ॥
क्षीरसमुद्र का बरैणों नीरू । श्वेतैं स्वरूप पियत जस क्षीरू ॥
खैरिचत १-२-३ ज़मीन ४ आसमान ५-२३ चक्की का पिल ६ राह ७-१०-
१५ कमी ८ दिल ९-१७-२६ देखना ११ लाल जवाहर तथा पद्मावत १२
सात पाताल १३ पोथी १४ बहादुर १६ सच्चाई १८ नामर्द १६ नाव २०
हवा २१ मददगार २२ जहाज़ २४ हज़ार २५ दूध २७-३२ अलग २८ पानी
२६ तारीफ़ ३० सफ़ेद ३१ ॥