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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 65

६४ पद्मावत ।
: है आगे पंथ दो बनहिं, गवनबै केहिदीप ।
ततखन बोला सुआ सरेखौ । अगवों सोई पंथ जेहिं देखा ॥
सो का उड़ै न जेहि तन पांखू । लैसोपलाशँहि बोलै शाखू ॥
जस अंधा आँधीकर संगी । पंथ न पाव होय सहलँगी ॥
सुनिमति काजचहसि जो साजा । बीर्जा नगर विजौगिरराजा ॥
पूंछा जहां कुण्ड औ गोलां । तजि वायें अंध्यारे खटोला ॥
दखिन दाहिने रहै तिलंगौ । उत्तरमांझ होय कहँोकंटंगा ॥
मांझ रतननपुर सौंह दुआरा । झारखण्ड वे वांयें पहारा ॥
दो० आगे बाउँ उड़ीसों, वायें देहिसु वौंट ।
दहिनाव्रत लायके, उतर समुद्रकी घाट ॥
होत पयान जाय दिनकेरों । मिरगार्ने मंहिं कीन्ह बसेरा ॥
कुश सांठर भइ सूरि सपेती । करवंटे आय वनी सुँइसेती ॥
क्यामिली जसभूमि गलीजा । चलिदसकोस ओसतनभीजा ॥
ठांव ठांव सब सोवहिं चेला । राजों जागै आप अकेला ॥
जेहिके हिये प्रेम रंग जामा । का तेहि नींद भूखविशरामाँ ॥
बन अँध्यार र्यानि अँधियारी । भादों बरन भयो अतिभारी ॥
किंगरी गहे हाथ बैरागी । पंचतन्त धुनिओही लागी ॥
दो० नयनं लाग तेहि मारेंगे, पद्मावत जेहि दीप ।
जैसे स्वाति बूँदकह, बन चातकै जलसीप ॥
राह १-६-१६-३१ जाना २ तोता होशियार ३ राहबतानेवाला ४ नाम
दरख्त ५ भोलामारहुआ ७ सलाह ८ नाम मुल्क ६ छोड़ना १० नाम मुक़ाम
तथा योग की क्रिया ११-१२-१३ नाम मुल्क तथा मुक़ाम मतलब १४ नाम
मुल्क १५ कूच १७ शामकेवक्त १८ जंगल तथा कबरिस्तान १६ तोशक
और लिहाफ़ २० तकिया २१ ज़मीन २२ जगह २३ रतनसेन सुरांद परसे-
श्वर २४ दिल २५ आराम २६ रात २७ नाम बाजा २८ पाँचतार २६ आँख ३०
पपीहा ३२ ॥