पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें। पद्मावत । ५१.
खनहि उठै खन बूड़ै, डोलै नहिं तिलछाड़ ॥(१०५)
श्रवण सीप दुइ दीप सँवारे। कुण्डल कनक रचे उजियारे ॥
मणिकुण्डल चमकहिं अतिलोने। जनुकैंबधाल वकहिं दुइ कोने ॥
दोउदिश चांदसूर्यचमकाहीं। नखतहँसरीनिरखि नहिंजाहीं॥
तेहिपर घूंघट दीप दुइ वारे। दुइ ध्रुवं दुहुं खूंट बैठारे॥
पहिरें घंटी सिंहलदीपी। जानहु भरे कहजही सीपी ॥
खनखन जाहि चीर शिरगहाँ। कांपतबीज धौलंदिशि रहा॥
डरहिं देव लोक सिंहला। पड़ैन बीज टूटि तेहि कला॥
दो० करहिं नखत सब सेवा, श्रवण दीन्ह अस दोउ ।
चांद सूर्य अस कहैं, और जगत का कोउ ॥ (१०६)
बैरण ग्रीवं कोंवै कीरीसा। कंचन तार जुलाग्यो सीसा ॥
कँडे फेर जानुगैं गाढ़े। हरी एडुंरें ठगे जनु ठाढ़े ॥
जनु हिये काढि परेवाँ ठाढ़ा। तेहिते अधिक भावगैं बढ़ा॥
चाक चढ़ाय सांच जनु कीन्हा। वागतुरंगें जानगाहिलीन्हा॥
गये मयूर तमचोरेँ जोहारा। उन्हें पुकारैं सांझ सकारा ॥
पुनितेहिठाँउ परी त्रिय रेखा। घूंट जो पीक लीक तसदेखा ॥
धन वह ग्रीवं दीन्ह विधि भाउ। वहिकाकहिं ले करे मिराँउ ॥
दो० कण्ठै श्री मुक्ताबन मालौ, सोहै अनूरुवै ग्रीवै ।
की होय हारकण्ठ लागै, कै तप साधा जीव ॥ (१०७)
कनकें दण्ड दुई भुजा कलाई। जानहु फेर कँडेरे भाई ॥
कान १-१३ सोना २-१८-३७ खूबसूरत ३ देखना ४ वाली ५-७ नाम
नखत ६ सेचना बिंजुली ६-१२ सफ़ेद १० तरफ ११ दुनियां १४ तारीख़ १५
गरदन १६-२०-२५-३०-३६ कलंगी १७ खरादी १८-३८ मोर २१-२७
दिल २२ कबूतर २३ बहुत २४ घोड़ा २६ सुरगा २८ जगह २६ ईश्वर ३१
मुलाक़ात ३२ नाम ज़ेवर ३३ मोतीका हार ३४ ज़ेवर ३५ ॥