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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 49

४६ पद्मावत ।
खण्ड सातवां श्रृंगारखण्ड पद्मावत ॥
का शिंगार वह बरर्णौं राजा । वहक शिंगार वही पै छाजा ॥
प्रथमे शीशँ कस्तूरी केशौँ । बलि बासुकिको और नरेशाँ ॥
भँवरकेश वह मालति रानी । विषहरँ लरहँ लेहिँअर्घौनी ॥
बेनी छोरि भार जो बारा । स्वर्ग पताल होय अँधियारा ॥
कोमलँ कुटिलँ केशँ नगकौरे । लहरे भरी भुअँगँ बैसारे ॥
बेधीजानि मलैयंगिरि वासा । शीशँ चढ़ी लोटहिँ चहुँपासा ॥
घुंघुरवार अलकें विषै भरे । संकरें प्रेम ज्यों गैयें परे ॥
दो० असफँदवार केशँ वै राजा, पराशीशँ मैं फांद ।
अष्टोकुलीनार्ग सब डरके, भये केशँ के बांदें ॥
बरैनौँ मांग शीशँ उपराहीं । सेंदुर असै चढ़ा जेहि नाहीं ॥
बिन सेंदुर अस जानहिं दिया। उजेरपंथे रैयैनि महँ किया ॥
कंचन रेख कसौटी कसी । जनु घनमहेँ दामिनि परगँसी ॥
सूर्य्यकिरणजनुगगनैँ बिशेखी। यमुना मांझ सरस्वती देखी ॥
खांड़े धार रुधिरँ जनु भरा । कर्रवँट ले बेनी पर धरा ॥
तेहि पर पूर धरे जो मोती । यमुना मांझ गङ्गाकी सोती ॥
कर्रवँट तपौँ लीन्ह होय चूरू । मगैँ सुरुधिरै लेदेइ सेंदूरू ॥
दो० कनकँ द्वादशँ बानि होय, चही सुहाग वह मांग ।
सेवा करहिं नखत शेशि तरैई, उवै गगनँ तस मांग ॥
तारीफ़ १ पहिले २ शिर ३-२०-२६-३२ मुश्क ४ बाल ५-६-१६-२६-
२५-२६ न्योछावर ६ नामसांप ७ आदमी = सांप १०-१७-१८ खुशबू ११
चोटी १२-४१ आसमान १३-३८-५० मुलायम १४ पेचदार १५ चन्दन १६
ज़हर २२ जंजीर २३ गरदन २४-२७ नाम सांप २८ गुलाम ३० तारीफ़ ३१
राह ३३ रात ३४ सोना ३५-४६ बिजुली ३६ चमक ३७ ख़ून ३६-४५
लोटके ४० नाम जगह जहाँ शिर कटाते हैं ४२ फ़क़ीर ४३ शायद ४४
ख़ालिस ४७ चांद ४८ नखत ४६ ॥