पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४४ | पद्मावत ।
औ बहुत तहां जो पद्मिनी लोनी १। घर घर सबके होहिं जस होनी ॥
दो० सबै बखानें तहां कर, कहंत सो मोसों आव ।
चहौं दीप वह देखा, सुनत उठा तस चाव ॥
का राजा हौं बरैनौं तासू । सिंघलदीप अह्रै कैलासू ॥
जो गा तहां भुलाना सोय । गये युग बीत न बहुरा कोय ॥
घर घर पद्मिनि छत्तीस जाती । सदा बसंत दिवसै अरु राती ॥
जेहिं जेहिं बरनैं फूल फुलवारी । तेहिं तेहिं वरनं सुगन्ध सुनारी ॥
गन्ध्रपसेन तहां बड़ राजा । अप्सरैंहिं माहिं इन्द्रासन साजा ॥
सो पद्मावत ताकी बाँरी । औ सब दीप माहिं उजियारी ॥
चहूँखण्ड के वर जो आहीं । गर्वहिं १० राजा बोलहिं नाहीं ॥
दो० उदित सूरै जस देखी, चांद छिपै जेहि धूप ।
ऐसे सबै जाहिं छिप, पद्मावत की रूप ॥
सुनि रबि १२ नाँउ रतनैं भारती १३। पण्डित वही फेर कहु बाता ॥
तुइ सुरङ्ग मूरति वह कहीं । चितमहँ लाग चित्रैं हैरही ॥
जनु होय सूर्य आय मनबसे । सब घटपूर हिये १६ परगँसे ॥
अबहूँ सूर्य चांद वह छाया । जल बिन मीनें रक्त बिन काया ॥
करनें करान आ प्रेम अँगूरू । जो शेशि स्वर्ग चढ़ौं होय सूरू ॥
सहसें किरन रूपमन भूला । जहँ जहँ दृष्टि २५ कमल जनु फूला ॥
तहां भँवर जहँ कमला गन्धी । भइ शाशी २६ राहुकेर ऋण बन्धी ॥
दो० तीन लोक खण्ड चौदह, सबै परै मोहिं सूझ ।
खूबसूरत १ तारीफ़ २-३ दिन ४ रंग ५-६ इंद्रलोककी परी ७ लड़की ८
चारों तरफ़ ६ ग़रूर १० सूर्य ११-१२-२३ राजारतनसेन १३ दीवाना १४
तसवीर १५ दिल १६ खिलना १७ मछली १८ वदन १९ नसनस में २०
चांद २१-२६ आसमान २२ हज़ार ज्योति तथा पद्मावत २४ निगाह २५ ॥