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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 318 में से

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पृष्ठ 42

सत कहि सती सँवारै सरा । आगलाय चहुँदिशि¹ सतजरा ॥
दुइजग² तरा सत्य जें राखा । और पियार दीन्ह सतभाखाँ ॥
सो सतछांड़ि जो धर्म बिनाशाँ। कामतिकीन्ह हिये⁴ सतनाशा ॥
दो० तँम सयान औ पण्डित, असतं न भाषौं काउ ।
सत्य कहो मोसों वह, काकर अपनाउँ ॥
सत्य कहत राजा जिव जाउ । पै मुखअसतं न भाषौं काउ ॥
हौं लिय सत्य निसस्यौ यहिँते । सिंहलदीप राजघर जेहिँते ॥
पद्मावत राजा की बारी । पद्मगन्धे शेशि दईसँवारी ॥
शेशि मुख अंगैं मलयँगिरिरानी। कनैंक सुगन्धहि द्वादशँ बानी ॥
है पद्मिन जो सिंहलमाहां । सुगंध स्वरूपसो वहकी छाहां ॥
हीरामन हौं तिहके परेवाँ । कंठि फूटि करत तेहि सेवा ॥
औ पायौं मानुष की भाखाँ । नाहीं तो पंखै मूठभरं पांखा ॥
दो० जबलहिं जियों रातदिन सँवरों, मरों वही लै नाउँ ।
मुखराताँ तनहरिहर कीन्हा, दुहूं जगंते लैजाउँ ॥
हीरामन जो कमल बखानौँ । सुनि राजा होय भँवरभुलाना ॥
आगे आव पंखैँ उजियारे । कहै सुदीप पतंग किय मारे ॥
रहा जो कनकें सुबासके ठाउँ । कस न होय हीरामन नाउँ ॥
को राजा कस दीप अतंगू । जेहिरे सुनत मन भयो पतंगू ॥
सुनिसुसमुद्रचरैं भये कलकलाँ । कमलवाहिभँवरहोय मिला ॥
कहौसुगंधधनि²⁸ कसनिरमॅली। भाअलि²⁹ संगकिअबहींकली ॥


फुटनोट्स:
चारौतरफ़ १ दोनों जहान २ बोली ३ नाश ४ दिल ५ झूठ ६-८ क़सूर ७
लड़की ६ कमलकी खुशबू १० चांद ११-१२ बदन १३ चन्दन १४ सोना १५-
२४ ख़ालिस १६ उड़ने वाले जानवर १७-१६-२३ आवाज़ १८ बाल २०
दुनियां २१ वयान करना २२ जगह २५ आंख २६ नाग जानवर २७ पद्मावत
२८ पाकसाफ़ २६ भँवर ३० ॥