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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 33

वहहै धर्ती¹ की स्वर्ग² का, पवन³ न पावै वास ॥
चहूँ पास समझावहिं सखी । कहांसु अव पावेगा पखी ॥
जवलहि पिंजर अहा परेवों । अहा बांध कीन्हेसि नितसेवा ॥
तेहि बन घन जो छूटेपावा । पुनिफिरवां दै होय कितआवा ॥
वै उड़ाम फुरहरी खाई । जो भा पंख पांख तनलाई ॥
पिंजर जेहक सौंप तेहिगयो । जो ज़ाकर सो ताकर भयो ॥
दशबाटें⁵ जेहि पिंजरमाहां । कैसे बांच मँजारी⁶ पाहां ॥
ये धर्ती अस कंतन लीले । अश्वपति⁸ गजपतिबहुवरकीले ॥
दो० जहँ न राति नहिंदिवर्स है, तहां न पान न खांन ।
तेहि बन सोतों है बसा, फेरि मिलावै आन ॥
सुवै¹¹ तहां दिनदश कैलकाटी । आयो व्याधै ढुका लै ठाटी ॥
पैगें पैग भुइँ चापत आवा । पंखहि¹⁴ देखि सबै डरखावा ॥
देखो कुछ अचरज अनभलौं । तरवरै एक आवत होचला ॥
यह बन रहंत गये हम आऊँ । तरवरै चलत न देखा काऊ ॥
आजजोतरवरे चलभलनाहीं । आवहु यह बनछांड़ पराँहीं ॥
वैतो उड़ै और बन ताका । पण्डितसुओं भूल मन थाका ॥
शाखा देखि राज जनु पावा । बैठिनिचिंते चूल्हा वह आवा ॥
दो० पांचे बाणकर खोंचा, लासा भरे सो पांच ।
पांखभरा तन उरझा, कित पारधिन बांच ॥
बन्दभौं सुओ करतसुखकेली । चूरै पंखमेलेसि घरठेली²७ ॥
ज़मीन १ आसमान २ हवा ३ उड़नेवाला जानवर ४-१४ ताबेदार वा
क़ैदी ५ दशराह तथा इन्द्री बदनके सुराख ६ बिल्ली ७ घोड़े का सवार ८ दिन
६ तोता १०-११-२१-२५ बहेलिया १२ क़दम बाक़दम १३ बुरा १५ पेड़ १६-
१८-१६ उमर १७ भागना २० ग़फ़िल २२ कंपा २३ क़ैद २४ बाजू को
तोड़के २६ मोरी २७ ॥