पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ३०६
कहै तोर हौं आहि सहेली । चल लैजाउँ भँवर जहँबेली ॥
तब मैं जाने कीन्ह सतबांधा । वहकर बोल लागि विषसांधा ॥
कहूँ कमल नहिं करत अहेराँ । जोहै भँवर करे सें फेरा ॥
पांचभूतै आत्मा नेवास्यों । बारैहि बार फिरत मनमाख्यों ॥
रोय बुझायों आपन हियराँ । कंत न दूर अहै सुठ नियरा ॥
दो० फूल वास घिव खीरै ज्यों, नीरै मिलाय मिठाइ ।
तस नुक्ताँ घट जेवरी, हिय दुख नाहिं कहाइ ॥
सुनि देवपाल राय करवाळू । राजा कठिन परा हियशालू ॥
दादुरै पुनि सो कमलकर भेखा । गीदरमुख न शूरकर देखा ॥
अपने रंग कस नाचि मयूरूँ । तेहि सेर साधककै रेतमें चूरू ॥
जबलागिआय तुरुकै गढ़बाजा । तबलगि धरिआनौ तौ राजा ॥
नींद न लीन्ह रैयनि सबजागा । होतबिहान आय गढ़लागा ॥
कम्मर्ले नेरअग्गर्म गढ़बांका । विषमँ पंथचढ़जाय न झांका ॥
राजा तहाँ गयो लै कालू । होय सामहिँ रोपौँ देवपालू ॥
दो० दोउ लड़े होय सम्मुख, लोहे भयो असूझ ।
शत्रु जूझे तब न्योरे, एक दोउ महँ जूझ ॥
खण्ड पैंतालीसवां देवपाल लड़ाई ॥
जो देवपालैँ राउ रण गाजा । मोहिँतुहिँ जूझ एकाकीँ राजा ॥
मेलेसि आय सांग विष भरी । मेट न जाय कालकी धरी ॥
विचारा १ शिकार २ देखता ३ देखना-सुनना-बोलना-सूंघना-छूना
४-रोकना ५ दरवाज़ा ६ दिलकी आग ७ दूध ८ पानी ६ तुझा-यह कि बदन
ने खाया और दिल दुखी परन्तु ज़ाहिर न किया १० सूराख ११ मेंढक १२
मोर १३ नाज़ १४ चिरौटा १५ बादशाह पहुँचे १६ रात १७ नाममुहंक १८
जहांजाना मुशकिल है १६ टेढ़ीराह २० आया २१ दुश्मन २२ लड़ाई २३
आखिर २४ नाम राजा २५ अकेले-२६ ॥