पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। ३०७
धने पूजी पियपांय द्वय, पियपूजी धनमाथ ॥
पूजा कवन देउँ तुम राजा। सबैतुम्हार आवमोहिं लाजा ॥
तनमय यौवन आरति करेऊं । जीव काढ़ न्योछावर देऊं ॥
पन्थे पूरकर दृष्टि बिछाऊं। तुमपगे धरो शीशे मैं लाऊं ॥
राखतपांयपलकनहिं मारों। बरुनिहिं सौरजें चरणहिंझारों॥
हियँ सोमंदिर तुम्हरो नांहां। नयन पंथे आवहुतेहिमांहां ॥
बैठोपांटे छत्र नव फेरी। तुम्हरे गर्व गर्बी हों चेरी ॥
तुम जियमैंतन जो लहिमयों। कहै जो जीय करै सोकयों ॥
दो० जोसूरज शिर ऊपर, तबसो कमल शिरछात।
नाहित भरी सरोवरें, सूखी पुरइनपात ॥
परश पांय राजाके रानी। पुनआरत बादले कहँआनी ॥
पूजे बादलं के भुज दण्डों। तुरी केपांउ दाबकरे खण्डा ॥
यह गजगवने गर्व्व सो मोरा। तुम राखा बादले औगोरा ॥
सेंदुरतिलक जो अंकुश रहा। तुम राखा माथे तौ रहा ॥
कालश्यामें तुमजियपरखेला। तुमजियआनमँजूषों मेला ॥
राखाछात चमर औ दारा। राखा क्षुद्रघंटे झनकारा ॥
होय ध्वजा हनुमंत तुम पैठी। तब चितौर लै आये बैठी ॥
दो० पुनि गजमत्ते चढ़ावा, नेते बिछाई लाट।
बाजतगाजत राजा, आय बैठ सुख पाँटे ॥
तस राजें रानी कंठलाई। पिय मरजियानारि जनु पाई ॥
पद्मावत १ राह २-१० निगाह ३ पांव ४ शिर ५ पलक ६ घूर ७ दिल ८ खा-
विन्द ९ तख्त ११-२८ ग़रूर १२ मुहब्बत १३ बदन १४ तालाव १५ नाममंत्री
१६-२२ बाजू १७ घोड़ा १८ हाथ १६ हाथी की चाल २० ग़रूर २१ खाविन्द
२३ सन्दूक २४ नाम जेवर २५ हाथी २६ जे़रअन्दाज़ २७ गले लगाई २६ ॥