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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 307

३०६ पद्मावत ।
तस मारेसि सैं घोड़े काटा । धर्ती फांट शेष फणनाथा ॥
अतिजो सिंहैं वरी है आई । शार्दूलै सो कौन बड़ाई ॥
दो० गोरापरा खेतमहँ, सुरै पहुँचावा पान ।
बादलै लैगा राजा, लै चितौर नियरान ॥
पद्मावत मन रही जो झूरी । सुनत सरोवरैं हियँ गा पूरी ॥
अद्र्रा महँ हुलासै जस होई । सुख सुहाग आदरसा सोई ॥
नयनजोकुमुदिनि लीन्हअँगूरू । उठाकमलअसउगवा सूरू ॥
पुरइन पूर सँवारी पाँती । औशिर आनधरा शिरछाता ॥
लाग्यो उदयहोय जस भोरा । रयनि १२ गईदिनकीन्हअजोरा १३ ॥
अस्ते अस्तकै पाई कलौ । आगोवली कटकै सब चला ॥
देख चांद अस पद्मिन रानी । सखीकुमोदैं सबैविकसानी ॥
दो० ग्रहन छूट दिनेरै कर, शशि २० सो भयो मिलाव ।
मंदिर सिंहासन साजा, बाजा नगर वधाव ॥
बिहँस चांद दय मांग सेंदूरू । आरत करन चली जहँसूरू ॥
औगोहनैं शशि नखत तराई । चित्तौरकी रानी जहँ ताई ॥
जनु बसन्तऋतु फली जो छूटी । की सावन महँ वीरबहूटी ॥
भा आनंद बाजा पँचतूरा । जगतरातैं है चला सेंदूरा ॥
अति मृदंग मन्दिर बहुवाजे । इन्द्रशब्दे सुन शब्दजोलाजे ॥
देखकन्त जस रवि २६ परकासाँ । पद्मावतमनकमल विकासाँ ॥
कमल पांव सूरजके परा । सूरज कमल आनि शिरधरा ॥
दो० सेंदुर फूल तँबोल सो, सखी सहेली साथ ।
शेर १ शेरखुर्ख २ देवता ३ नाम मंत्री ४ तालाव ५ छाती ६ नामनखत ७
खुशी ८ कोकावेली ६-१७ सूर्य १० तख्त ११ रात १२ रोशनी १३ रामराम
कर १४ कल १५ फ़ौज १६ खिलना १८-२८ सूर्य १६-२१-२६ चाँद २०-२३
साथ २२ लाल २४ आवाज़ २५ रोशनी २७ ॥