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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 306

पद्मावत। ३०५
औ तासों सालार सो आये। जेहिं कबरो पांडवेँ बँद पाये ॥
लंधौरै देव धरा जेहि आवे। औ कोमालै वाद कहँ पावे ॥
पहुँचा आय सिंह असवारू। जहां सिंह गोरा बरयारू ॥
मारेसि सांग पेटमहँ धसी। काढ़ेसि हुमुकआंतभुइँ खसी ॥
दो० भाट कहा धनगोरा, तुइँ महिरावण राउ।
आंत समेटकर बांधे, तूरी देत है पांउ ॥
कहेसिअंतँ अबमाभुइँ परना। अंतकोनित्तं खेहँ शिरभरना॥
कहिके गरज सिंह असधावा। सुरजा शार्दूल पहँ आवा ॥
सुरंजनै कीन्ह सांगपर घाऊ। परीखङ्गैं जनुपरा निहाऊँ ॥
वज्रकी सांग वज्र का डांड़ा। उठी आगतस बाजा खांड़ा ॥
जानहु वज्र वज्र सों बाजा। सबही कहापरी अबगाजौं ॥
दूसर खङ्गे कंधपर दीन्हीं। सुरजेंवह ओड़नै परलीन्हीं ॥
तीसर खङ्ग कूदपर लावा। कांधगरर्जें हंत घाव न आवा ॥
दो० तस मारा हतगोरें, उठी वज्रकी आग।
कोउ नेरे नहिं आवै, सिंहैं सेंदूरो लाग ॥
तस सुरजा कोपा वरबंडी। जान सेंदूर केर भुज दंडा ॥
कोप गरज मारेसि तब बाजा। जानहुपरी तुरतशिरगाजौं॥
टाटैरैं टूट टूट शिर तासू। सैं सुमेरुँ जनूटूट अकासू ॥
धमक उठा सब स्वर्गे पतारू। फिर गइ दीठें फिरा संसारू ॥
भा परलै अस सबही जाना। काढ़ा खङ्गैं स्वर्ग नयराना ॥

नाम सिपहसालार १ नामदेव २ नाम संजा ३ ज़बरदस्त ४-१६ घोड़ा
५ आख़िर ६ हमेशा ७ राख ८ शेरसुर्ख ९ नाम पहलवान १० तलवार ११-१४
निहाई १२ बिजुली १३-२० ढाल १५ उछलतलवार पर तलवार परी १६
शेर १७ शेरसुर्ख १८ खोपड़ी २१ पहाड़ २२ आसमान २३-२६ निगाह २४
तलवार २५ ॥