पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०४ पद्मावत ।
कोप सिंहे सामहिं रण मेला । लाखन सों ना मरै अकेला ॥
लियो हांक हस्तिनें की ठट्टा । जैसे सिंहे विदारै घटा ॥
जेहि शिर देइ कोप तरवारू । सें घोड़े टूटहिं असवारू ॥
टूटकुंध शिर परैं निरौरी । माठ मँजीठ जानुरण डारी ॥
खेल फाग सेंदुर छिरकावे । चाचर खेल आग रणलावे ॥
हस्ती घोड़ धाय जो धूका । औतेहि दीन्हसोरुधिर भभूका ॥
दो० भइ आज्ञा सुलतानी, बेगें करहु यह हाथ ।
रतन जात है आगे, लिये पदारथे साथ ॥
सबै कटकैं मिल गोरौँ छेंका । गूँजतसिंहेँ जायनहिं टेका ॥
जेहिदिशि¹५ उठै सोइ जनुखावा । पलटिसिंहँतेहिठाउँनआवा॥
तुर्क बोलावहिं बोलै नाहां । गोरें मीचें धरी जियमाहां ॥
मुवे पुनि¹⁶ जूझजाज जगदेऊ । जियत न रहा जगतमहँकेऊ॥
जन जानहु गोरा सो अकेला । सिंहेंकी मूछ हाथको मेला॥
सिंह जियतनहिं आप धरावा । मुवे पीछ कोऊ घिसयावा ॥
करै सिंह मुँह सौहैं जो दीठी । जवलग जिये देयनहिंपीठी ॥
दो० रतनसेन जो बांधा, मसिं²° गोराके गाँतै²¹ ।
जब लग रुधिरैं²² न धोऊँ, तवलग होयनराँतै²³ ॥
सुरजौँ वीर सिंह चढ़ गाजा । आय सौहैं गोरा सों बाजा ॥
पहलवान सो बखाने वली । मदद मीरहमजाँ औ अली ॥
मददअयूर्ब²५ शीश²६ चढ़ कोपी । महाभारत²७ नाउँ अलंपी³० ॥
शेर १-३ हाथी २-७ फाड़ना ४ अलग ५ लाख ६ लोहू = हुक्म. ६ जल्द
१० तथा पद्मावत ११ फ़ौज १२ नाममंत्री १३ शेर १४-१६-१६ तरफ १५
मौत १७ ऐबादशाह चमेरे हाथ न आऊँगा १८ सामने निगाह २० सियाही
२१ बदन २२ खून २३ लाल २४ नाम पहलवान २५-२७-२८ सामने २६ शिर
२६ बड़े बहादुरों का नाम मिटानेवाले ३० ॥