पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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३०० पद्मावत।
भा जिव घिव रखवारी केरा। द्रव्य लोभ चौंडोल न हेरा ॥
जाय शाह आगे शिर नांवा। ऐजग सूरं चांदचलिआवा ॥
जानवन्त सब नखतैं तराई। सौरहसै चण्डोल जो आई ॥
चित्तौर जेत राज की पुञ्जी। लैसो आय पद्मावत कुञ्जी ॥
बिनती करै जोर करै खड़ी। लै सौंपों राजा इक घड़ी ॥
दो० यहां वहां के स्वामी, दोहूँ जगत मोहिं आशँ।
पहिले दरश देखाव नृपै, तब आऊँ कैलाश ॥
अर्जा भई जाय इक घरी। ढूँढ जो घरी फेर विधि भरी ॥
चलिविमानैं राजापहँ आवा। सँग चौंडोल जगत सबछावा ॥
पद्मावत के वेषै² लोहारू। निकसकाटिबंदै³ कीन्हजोहारूँ ॥
उठा कोप जस छूटा राजा। चढ़ा तुरंगैं सिंहैं असगाजा ॥
गोरा बादलँ खांड़े¹⁷ काढ़े। निकस कुँवरचढ़चढ़ भे ठाढ़े ॥
तीर्थे तुरङ्गगगनें शिरलांगा। कौन जुगत कर टेकै वागा ॥
जो जिय ऊपर खड्ग सँभारा। मरणहार सो सहँसहिं मारा ॥
दो० भइ पुकार शाहसों, शशि²¹ औ नखत सो नाहिं।
छलकैन ग्रहन गिरासा, ग्रहन गिरासी छांहिं ॥
लै राजा चितौर कहँ चले। छूटो मिरँगै सिंहैं करवले ॥
चढ़ा शाह चढ़े लांग गुहारी। कटकैं असूझपरी जगकारी ॥
फिर गोरा बादेल सो कहा। ग्रहनँ लूट पुनि²⁷ चाहै गहा ॥
चहुँदिशि²⁸ आवा लोपत भानूँ। अब यह गोय यही मैदानू ॥
पाद-टिप्पणियाँ (Footnotes):
'तलाशलेिना १ सूर्ये २ सखी-सहेली ३ अर्ज ४ हाथ ५ मालिक ६ उम्मेद
७ राजा ८ हुक्म ६ ईश्वर १० चण्डोल ११ सूरत १२ वेड़ी १३ सलाम १४
घोड़ा १५-१६ शेर १६-२४ नाममंत्री १७ तलवार १८ आसमान २० हज़ार
२१ चांद तथा पद्मावत २२ हरिण २३ फ़ौज २५ राजा २६ फेर २७ चारोतरफ़
२८ सूर्य २६ ॥