पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 300, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २६६
जहां फूल तहँ फूल है, जहां कांटे तहँ कांटे ॥
सोरह सै चयडोल सवारी । कुँवर सजायेले तहँ बैठारी ॥
पद्मावत कर साज बेवानू । बैठ लुहार न जानै आनू ॥
रच बेवान सौ साज सँवारा । चहुँदिशिँ चमरकरहिंसबदाराँ ॥
साज सबै चयडोल चलाई । सुरँग उहार मोति बहु लाई ॥
भय सँग गोरो बादल बली । कहत चले पद्मावत चली ॥
हीरा रतन पदार्थ झूलहिं । देख बिमानँ देवता भूलहिं ॥
सोरह सै सँग चलीं सहेली । कमल न रहा और को बेली ॥
दो० राज छुड़ावन रानिचलि, आपहोय तहँ ओल ।
तीससहर्स तुरि खींचसँग, सोरहसै चयडोल ॥
राजा बँद जेहिके सौंपना । गागोराँ तापहँ अगमनाँ ॥
टका लाख दशदीन्ह अकोरों । बिनती कीन्हपांयगहिगोराँ ॥
बिनवौं बादशाह सो जाई । अब रानी पद्मावत आई ॥
बिनँती करै आयहूँ देहिली । चित्तौरकी मोसों है कीली ॥
बिनँती करै जहां है पूँजी । सब भँडारूँ की मोसों कूँजी ॥
एक घड़ी जो अज्ञा पाऊँ । राजा सौंप मंदिर महँ आऊँ ॥
तब रखवारँ गये सुलतानी । देख अकोरेँ भये जसपानी ॥
दो० लीन्ह अँकोर हाथ जो, जीउ दीन्ह तेहि हाथ ।
जो वह कहै करैसो, कहीं छांड़ नहिं माथ ॥
लोभ पाप की नदी अकोराँ । संतै न रहै हाथ जो बोरा ॥
जहँ अकोर तहँ नेकैं न राजू । ठाकुरकेर बिनाशहिं काजू ॥
बहादुर १ सूर्य २ चारोंतरफ ३ औरत ४ राजमंत्री ५-१० जवाहिरोत ६
चयडोल ७ तीसहज़ार ८ घोड़ा ६ पहिले ११ रिशवंत-नज़राना १२-२१-
२२-२३ अर्ज़ १३-१४-१५-१७ कुंजी १६ खज़ाना १८ हुक्म १६ दारोगा २०
ईमान २४ राजअच्छा नहीं २५ ख़राब २६ ॥