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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 302

पद्मावत । ३०१
तुइँ अब राजा लैचल गोरा। हौं अब उलटजेरों झाजोरा ॥
वहँ चौगान तुर्क कस खेला। है खिलार रणजरोँ अकेला ॥
तब पाउँ बादल अस नाउँ । जब मैदान गोय लै जाउँ ॥
दो० आजखड्ग चौगान गँहि, करोंशीश रण गोय।
खेलौं सौंहे शाहंसो, हाल जगत महँ होय ॥
तब अगमने है गोराँ मिला। तुइँ राजा लै चल बादलाँ ॥
पिताँ मरे जो सारी साथे । मीच न देय पूतके माथे ॥
मैं अब आंयु भरी और मूँजी। का पछताव आय जो पूँजी ॥
बहुतहिं मार मरों जो जूझी। ताकहँ जन राखहु मनबूझी ॥
कुँवरसहसे सँगगोराँ लीन्हीं। और वीरबादलै सँग कीन्हीं ॥
गोरहिं १४ समुद्र मेघअसगाजा। चला लीन्ह आगेकर राजा ॥
गोराँ उलट खेतभा ठाढ़ा। पूरूँर्ष देख चाउँ मनबाढ़ा ॥
दो० आवकटंक सुलतानी, गगनँ छिपामँसि मांझ।
परत आव जग कारी, होत आव दिन सांझ ॥
द्वै मैदान परी अंब गोय। खेलहार वहँ काकर होय ॥
यौवन तुरी चढ़ी जो रानी। चलीजीत अति खेलसयानी ॥
कटि २१ चौगानगोय कुंचै साजी। हियँ मैदान चली लै बाजी ॥
हालै सो करै गोयलै बाढ़ा। गोली दुहुँ पैचकै काढ़ा ॥
भइ पहार वै दोनों गोरी २६। दृष्टि २७ नेर पहुँचत सुठ दूरी ॥
ठाढ़े वाण चलहिं अस दोऊ। शार्लेहिं हिये २६ न काढ़ै कोऊ॥
मुकाबिल १ पकड़ना २ शिर ३ सामने ४ आगे ५ नाममंत्री ६-७ बापकी
जगह राजा साथहै ८ मरना बेटेका न देखेगा ६ उमर १० हज़ार ११ नाम
मंत्री १२-१३-१४-१५ मर्द १६ चाह १७ फ़ौज १८ आसमान १६ सियाही २०
घोड़ा २१ कमर २२ छाती २३ सीना २४ हलचल २५ तथा छाती २६ निगाह
२७ सुराख २८ दिल २६ ॥