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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 294

... मुहुँ पंथ तहँ गवनब, कंत गये जेहि बाट ॥
गोरा बादल दोऊ पसीजे। रोवत रुधिरं शीशँ लहिभीजे ॥
हम राजा सों यही कुहाँने। तुमनहिं मिलो धरै तुरकाने ॥
जो मति सुन हम आय कुहाये। सो नियार्न हम माथे आये ॥
जबलगि जिये न भाँगहिं दोऊ। स्वामिन जिय कित योगिन होऊ॥
उये अगस्त्य हँस्ति अवगाजा। नीर घटे घर आवै राजा ॥
वर्षा गयो अगस्त्य की दीठी। परै पलाने न तुरंगनँ पीठौ ॥
वेधों राहु छुडाऊँ सूरै। रहै न दुखकर मूलँ अंगूरू॥
दो० वह सूरज तुम शशिवदन, आन मिलाऊँ सोय ।
तस दुख महँ सुख उपजै, रैनि मांझ दिन होय ॥
लीन्ह पान बादल औ गोरा। गहि लैदेउँ उपम तुम जोरा ॥
तुम सावन्तरैन सरवरं कोऊ। तुम हनुमंतै अंगद सम दोऊ ॥
तुम अर्जुन औ भीमें भुवारा। तुम बलवीर सो मन्दन हारा ॥
तुम तारन भारन जग जानी। तुम सों पुरुष औ कर्ण बखानी ॥
तुम अस मोरे बादल गोरा। काकर मुख हेरौं २६ बँदछोरा ॥
जस हनुमंत राघव वँद छोरी। तस तुम छोर मिलावहु जोरी ॥
दो० जैसे जरत लक्ष घर, साहँस कीन्हा भीउँ ।
जरत खम्भ तस काढ़ो, कै पुरषारथ जीउ ॥
रामलपण सम दैत्य संहारा। तुमहीं घर बलभद्रं भुवारा ॥
तुम द्रोनों औ पितागे गेऊँ। तुम लेखो ईश्वर सहदेऊँ ॥
नाममंत्री १ खून २ शिर ३ खफ़ा होना ४ सलाह ५ आखिर ६ नाम
नक्षत्र ७-८ पानी ९ निगाह १० चारजामा ११ घोड़ा १२ सूर्य्य १३ जड़ १४
चांद १५ पैदा १६ रात १७ जोड़ी मिलादौ १८ बहादुर १६ चराचर २०-२५
नाम शूरवीर २१-२२-२३-२४-२५-२८-३१-३२-३३ देखना २६ बहादुरी २७
बलभद्रका घर खराब किया ३० ॥