पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें.२६० पद्मावत ।
रामकुण्डे गोमंति गुरुद्वारू । दाहिनवर्त कीन्ह कै भारू ॥
सेतुबंध कैलासै सुमेरू । गयौंअलखपुर जहां गँभीरू ॥
ब्रह्मवर्त ब्रह्मावर्त परसी । बेनी संगमे सीसों करसीं ॥
नीलकंठे मिश्रिर्षे कुरुजेटों । गोरखनाथे अस्थाने समेटा ॥
दो० पटना पूर्व सो घर घर, हाड़ फिर्यो संसार ।
हेरंत कहूँ न पियमिला, नाकोइमिलवनहार॥
वन बन सब हेर्यो नवखण्डा । जलजलनदी अठारहगण्डा ॥
चौसठ तीर्थ कीन्ह सब ठाऊँ । लेत फिर्यो वह पियकरनाऊँ ॥
देहली सब देख्यों तुरकानू । औसुलतान केर बँदेवानू ॥
रतनसेन देख्यों बँद माहां । जरै धूप खनें पावन छाहां ॥
सब राजा बांधे औ दागी । योगिनजान राजपंगलागी ॥
कासोंभोगैं जहँअन्त न गयऊ । यहदुखलैसोगयोसुकंदयऊ ॥
देहलीनाउँ न जानों ढीली । सठबँदै गाढ़निकसनहिंगेली ॥
दो० देख दगधै दुखताकर, अझो क्यों नहिं जीउ ।
सो धनै कैसेंवहजिये, जाकर अस बँदपीउ ॥
पद्मावत जो सुना बँद पीउ । पराअगिनिमहँ जानहुघीउ ॥
दौरे पांय योगिन के परी । उठी आग योगिनपुनिजरी ॥
पांय देहु दुइ नयन न लाऊं । लैचल तहां कन्तजेहिठाऊं ॥
जेहि नयनन तुइँ देखा पीउ । मोहिं देखाय देव बल जीउ ॥
सत औ धर्म देउँ सब तोहीं । पियकी बात कहै जो मोहीं ॥
तुइँ मोर गुरु तोर हौं चेली । भूली फिरत पन्थे जे मेली ॥
नामतीर्थ १ से १४ तक । नामयोगी १५ मकान १६ ढूँढ़ना १७ क़ैद-
ख़ाना १८ कभूं छाया नहीं पाता १९ पालागन राजाने किया २० लेकिन
क्या अस्तियार जहां दखल गैरका न हो २१ भारी क़ैदखाना जहां से नि-
कलना मुश्किल है २२ जलना २३ बदन २४ औरत तथा पद्मावत २५ राह २६॥