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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 287

२८६ पद्मावत ।
यौवन जाउ जाउ सो भँवरा । पियाकी प्रीति न जाय जो सँवरा ॥
यहिजग जो पियकरहिंनफेरा। वहजगमिलहिंजोदिनदिनमेरा ॥
यौवन मोर रतन जहँ पीउ । वलें सोपियपर यौवन जीव ॥
दो० भरथँरि विछोहैं पिंगला, आहकरत जिवदीन्ह ।
हों पापिन जो जियतहों, यही दोर्ष हम कीन्ह ॥
पद्मावत सो कौन रसोई । जहाँ प्रकारँ दूसर नहिं होई ॥
रस दूसर जेहि जीभहि बैठा । सो जानें रस खटा औ मीठा ॥
भँवर बास बहु फूलहिं लेई । फूल बास बहु भँवर न देई ॥
तुइँ रस पुरुष न दूसर पावा । तेहिजाना जेहिलीन्हपरावा॥
इक चुल्लू रसअर नहिं हियाँ । जौलहि नहिं फिर दूसर पिया॥
तोर यौवन जस समुद्र हिलोरा । देख देख जिय बूडै मोरा ॥
रंग और नहिं पाई वैसे । जन्में और तुइँ पावत कैसे ॥
दो० देखधनुष तोर नयना, मोहिलागा विष वान ।
विहँसै कमल जो मानै, सँवरै मिलाऊँ आन ॥
कुमुंदिनि तुइँ बैरिन नहिं धाई । मोहिं मसि बोलछलों वेसिआई ॥
निरमलै जगतनीरे करनामा । जो मसि परै होयसो श्यामाँ ॥
जहँवाँ धर्म पाप नहिं दीसा । कनकें सुहागमां भजससीसा ॥
जो मसि परै होय शशिकारी । सोहँसलाय देहेसिमोहिं गारी ॥
कापर महँ न छूट मसि अंकू । सोमसिलाय मोहिंदे सकलंकू ॥
श्याम भँवर मोर सूरूज करा । और जो भँवर श्याममसिभरा ॥
कमल भँवर रवि देखै आंखी । चन्दन पास न बैठै माखी ॥
·मुलाक़ात १ कुरबान २ नामराजा ३ जुदाई ४ नामरानी ५ पाप ६ दुइ-
तरह ७ मज़ा ८ मर्द ६ दिल १० तथा बुढ़ापा ११ हँसना १२ तथा दूसरा
खाविन्द १३ नामदूती १४ कारिख १५ दग़ा १६ पाकसाफ़ १७ पानी १८
सियाही १६ काला २० सोना २१ चांद २२ दाग़ २३ ऐब २४ सूर्य २५ ॥