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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 286

पद्मावत । २८५
जो जिव तौ यहि यौवन भला । आपहि जैसा करै निरमलो ॥
कुलकरपुरुषै सिंहै जेहि केरा । तेहिथलें कैसिसियार बसेरा ॥
हियों फाड़ कूकुर तेहि केरा । सिंहै तजि सियार मुख हेरा ॥
यौवन नीर घटेका घटा । सतँके बेर न जाय हियेँ फटा ॥
सघनं मेघहै श्यामं बरीसहिं । यौवन नयेतरंवरे है दीसहिं ॥
दो० रावणपाप जो जिवधरा, दोउ जगत मुँहकार ।
राम शरण जो मन धरा, ताहि छलै को पार ॥
कित पावसि पुनि यौवनरातोँ । मैमँतेचढ़ा श्यामशिरछाता ॥
यौवन बिना वृद्धि हो नाउँ । बिन यौवन थाकै सब ठाउँ ॥
यौवन हेरत मिलै न हेरा । तेहिपुनि जाहिंकरहिंनहिंफेरा॥
अहहिजोकेशनरंगभवँरजोबसा।पुनिबकँहोहिजगतसबहँसा॥
सेंवर सेचन चेत कर सुवा । पुनि पछतास अंतहो भुवा ॥
रूप तोर जग ऊपर लोनों । यहि यौवनपाहुनजलसोना॥
भोग विलास केर यह बेरा । मानलेहु पुनिको केहिकेरा ॥
दो० उठत कोप जसतरवरैं, तसयौवन तोहिरातँ ।
तौलह रङ्ग लहो रच, पुनि सो पियरहो पात ॥
कुँमुदिनि बैनैं सुनतही जरी । पद्मिनि हियेँ आगजनुपरी ॥
रँग ताकर हौं जारों रचा । आपन तर्जै जो पराये लचा ॥
दूसर करै जाय दुइँ बाटा । राजा दुइ न होहिं इकपाटाँ ॥
जेहि जिय प्रेमप्रीतिदृढ़ होई । सुख सुहाग सों बैठौ सोई ॥
साफ़ १ खाविन्द ब्याहाहुवा २ शेर ३ जगह ४ छाती ५-६ देखना ६
पानी ७ ईमान ८ बादल १० खाविन्द ११ पेड़ १२-१६ लाल १३-२०
मस्त १४ मुक़ाम १५ सांप १६ बगुला १७ ख़ूबसूरत १८ नामदूती २१
बात २२ दिल २३ छोड़ना २४ दूसर राह तथा नरक २५ तख़्त २६
मज़बूत २७ ॥