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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 276

पद्मावत । २७५
सौ तुषार तीस गज पावा । दुन्दुभिऔचौ घोड़ीदेवावा ॥
दूजे पँवर दिया असवारा । तीजे पँवर नग दीन्ह अपारा ॥
चौथे पँवरदै द्रव्य करोरी । पाँचयें दुइ हीरा की जोरी ॥
दो० छठयें पँवर माड़ो दियो, सतयें दीन्ह चँदेर ।
सात पँवर नांघत नृपति, लेगयों बांध गरेर ॥
यहिजग बहुत नदीजलजोड़ा। कौन पारभा कौन न बूड़ा ॥
कौन अन्धभा आग न देखा। कौन भयो डीठार सरेखां ॥
व्याध भई राजा कहँ माया। तजकैलास परी भुइँ पायाँ ॥
जेहिकारण गढ़कीन्ह अँगूठी। कित छोड़े जो आवै सूठी ॥
शत्रुहि कोउ पाव जो बांधे। छोड़ आपकहँ करै वियोंधे ॥
चारा मेल धरा जस माछू। जलसे विकसमरै जसकाँछू ॥
शत्रुहि नांग पेटारी मूँदा । बांधामिरगै पैगनहिं खूँदा ॥
दो० राजा धरा आनके, तन पहिरावा लोह ।
ऐसो लोह सोपहिरे, चेतैं श्यामकी ओह ॥
पांयन गाढ़ी बेड़ी परी। सांकर ग्रीवैं हाथ हथकड़ी ॥
औ घर बांध मँजूषा मेला। ऐसो शत्रु जनु होयदुहेलाँ ॥
सुनि चितौरमहँ पड़ा बखानौँ। देश देश चारहुँदिशजाना ॥
आजनरायण फिर जग बूँदौँ। आजसोसिंहँ मँजूषौ मूँदा ॥
आज खँसे रावण दशमाथा। आजकान्हेँ कालीफएनाथा॥
आजहिं प्राणकंस कर ढीला। आजमीनैं शंखासुरै लीला ॥
घोड़ा १ हाथी २ डंका ३ बग्धी ४ राजा ५ होशियार ६ जिसलिये ७
घेरना ८ दुश्मन ६-१२ दुख १० कछुवा ११ पैरबँधा हिरन नहीं भागता १३
ग़फ़लतका फल उठाये १४ गर्दन १५ पिंजरा १६-२१ दुखी १७ बयान १८
सख़्ती १६ शेर २० गिरना २२ श्रीकृष्णजी २३ मछली २४ नामदैत्य २५ ॥