सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 275, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 275

२७४ पद्मावत ।
भौंहधनुषशशि दुइज ललाटू । सब शनिन ऊपर वह पाटू ॥
सोई मिरगं देखाय जो गयो । वेनी नाग दिया चितभयो ॥
दरपण महँ देखी परछाईं । सोमूरति भीतर जिव नाहीं ॥
दो० सबै श्रृंगार बनी धनि, अब सोलीमाँत कीज ।
अलकँजोलटकीअधरंपर, सोगहि केसरलीज ॥
खण्ड उन्तालीसवां क़ैद होना राजा
रतनसेन का ॥
मीते भा मांगा वेग बेवानू । चला सूरै सँवरा अस्थानू ॥
चलंत पंथै राखा जो पाऊं । कहांरहेथिरें चलत बैठाऊं ॥
पथिकै कहँ कहवां ससताई । पंथै चलै तब पंथ सेराई ॥
छल कीजे दल जहां न आंटों । लीजे फूल टारके कांटा ॥
बहुत मया सुन राजा फूला । चला साथ पहुँचावे भूला ॥
शाह हेत राजा सों बांधा । वात हिलाय लीन्ह गहि कांधा ॥
घिव मँधु सान दीन्ह रससोई । जो मुँह मीठ पेट विष होई ॥
दो० अमिय बचन औ माया, को न मुयो रस भीज ।
शत्रु मरै अमृत जो, तेहि विष काहे दीज ॥
चांद घरहि जो सूरज आवा । होयसो अलोपं अमावसपावा ॥
पूछहिंन खंतेँ मलीनसोमोती । सोरहकला न एकोज्योती ॥
चांद गहन आगाहिं जनावा । राज भूलगहिशाहचलावा ॥
पहिले पँवरै नांघ सो आई । ठाढ़े भये राज पहिराई ॥
चांद १ माथा २ तख्त ३ हिरन ४ चोटी ५ पद्मावत ६-२७ अक़िल ७
ज़ुल्फ़ ८ होंठ ६ पकड़ना १० दोस्त ११ सवारी १२ बादशाह १३ मकान १४
राह १५-१६ क़ायम १६ मुसाफ़िर १७-१८ पहुँचना २० पकड़ना २१ श-
हद २२ मीठीवात २३ दुश्मन २४ छिपजाना २५ तथा सखी २६ ख़बर २८
दरवाज़ा २६ ॥