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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 250

पद्मावत । २४६
बरसहिं सेल बान होय कांदों । जस बरसै सावन औ भादों ॥
लपटहिं कोप परहिं तरवारी । औ गोला ओला जस भारी ॥
जूझै बीर लिखौं कहँ ताई । लै अप्सरै १ कैलास सिधाई ॥
दो० स्वामि काज जो जूझै, सोइगये मुख रातै २।
जो भागे संत छांड़ के, मँसिमुखचढ़ैबरातै ॥
भा संग्राम नभा अस काऊ । लोहे दुहुँदिशि भयो अगाऊ ॥
कन्दहि कोदहिपुरं भुँइँपरे। रुधिरसलिलैं'होय सायर भरे ॥
आनंद व्याह करै मसखावा । अभभख जन्मजनमकहँ पावा॥
चौंसठ योगिन खप्पर पूरा । बुकेंजम्बुकै घर बाजहिं तूरा ॥
गृद्ध चील्ह सब मण्डपछावहिं । काककलोलकरहिंऔगावहिं॥
आज शाहहठभैनी बिवाही । पाई भुक्ति जैसि मनचाही ॥
जेहिं जस मांसू अखा परावा । तस तेहिकर लै औरहिं खावा॥
दो० काहू साथ न तनको, सकत मुवे सब पोष ।
ओछे १५ पूरजू जानत, जो नहिंआवतजोष ॥
चांद न टरै सूर सो कोपा । दूसरि छत्र सौहिं १७ के रोपा ॥
सुना शाह अस भयो समूहा । पेले सब हस्तिनें के जूहा ॥
आज चन्द्र तोर करौं निपांतूं । रहै न जगमहँ दूसर द्यूतू ॥
सहसें किरन होय किरनपसारा। छेंका चांदे जहांलग तारा ॥
ढेरै लोहे दरपन भा आवा । घटघट जानों भोंचु देखावा ॥
बहु क्रोधित सेनों हलधाई । अगिन पहार जरत जनु आई ॥
इन्द्रलोक की परी १ गालिका २ लाल ३ सियाही ४ ईश्वरके सामने ५
लड़ाई ६ तलवार की विजुली से बहुत लोग ज़मीन में गिरे ७ पानी ८ ता-
लाव ९ भेड़िया १० सियार ११ फ़ौज १२-२३-२५खुराक १३ तनसाथ नहींजाता
चाहे मोटा हो १४ ओछा पेटफरता-जोदाना है अन्दाज़ रखता १५ सूर्य्य १६सा-
मने १७ गुस्सा १८ हाथी १६ नाश २० हज़ार २१ तथा राजा २२ तलवार २४ ॥