पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४८ पद्मावत।
शाह आय चितोरगढ़ बाजां । हस्ती सहसबीस सँगगाजा ॥
उनई आय दोउ दल गाजे । हिन्दू तुरुक दोउसमें बाजे ॥
दोउसमुंद्रदधि उदधि अपारा । दोनों मेरु खंखड पहारा ॥
कोप जो झार दुहूँदिश मेली । औ हस्ती हस्तहिं सो पेली ॥
आंकुश चमक बीज असवाजहिं। गरर्जाहंहस्तिमेघजनुगाजहिं ॥
दो० धर्ती स्वर्ग दोऊ दल, जूझहिं ऊपर जूझ ।
कोई टरै न टारै, दोनों वज्र समूह ॥
खण्डपैंतीसवां सुलह राजा और वादशाह ॥
हस्तिंहि साँहस्ती हठगाजहिं । जनु परवत परवतसोंबाजांहं ॥
कोउ गयंद न टारें टरहीं । टूटहिं दांत मूँड़ गिरंपरहीं ॥
परबतआय जो परहिं तराहीं । दलं महँ चांपखेहँ मिलजाहीं ॥
कोइ हस्ती असवारहिं लेहीं । सूँड़ समेट पांय तर देहीं ॥
कोइ असवारसिंह दै मारहिं । हन मस्तक सों सूँड़ उतारहिं ॥
गैब गयंदैं तनगगनें पसीजा । रुधिरे चले धर्ती सबभीजा ॥
कोइ मैमत सँभारहिं नाहीं । तबजाने जब गुदशिरेंखाहीं ॥
दो० गगन रुधिर जसवरसे, धर्तीभीज मिलाय ।
शिरधरटूटंबिलाहिंतस, पानी वेगेँ विलाय ॥
उठो बज्रजूझे जस सुना । तेहिंते अधिकै भयो चौगुना ॥
बाजहिं खङ्ग उठी डर आगी । भुइँजर चही स्वर्ग कहँ लागी ॥
चमकहिं बीज होय उजियारा । जेहि शिरपरै होय दुइ फारा ॥
सेनमेघ अस दुहुँदिशि गाजा । खङ्गजोबीजबीजें असवाजा ॥
पहुंचा १ हाथी २-६-७-८ बराबर ३ समुद्र दही का ४ पहाड़ ५ फ़ौज ६
धूर १० शेर ११ गरूर १२ हाथी १३ आसमान १४-२१ खून १५ भेजा
शिरका १६ जल्द १७ भारी लड़ाई १८ बहुत १९ तलवार २० वादल सी
फ़ौज २२ बिजुली २३ ॥