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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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२४० | पद्मावत ।
खुरासाने औ चला हरेऊँ । गोरेँ बँगाल रहा नहिं केऊ ॥
रहा न रूमे शामे सुलतांनू । काशमीरेँ ठट्ठौँ मुलतानू ॥
जहँतक बड़बड़ तुरुवा जाती । मांडोवाली अरु गुजरोंती ॥
पटनौ उड़ीसौ के सब चले । लै गजहस्ति जहांगल भले ॥
कमरूँ कामतेँ औ पँड़वैई । देवगढ़ैलेत उदयगिरि १७ आई ॥
चला सो परबत और कर्मेऊँ । घिसर्योनगर जहांगल नाऊँ ॥
दो० उदयअस्तं लहिदेश जो, को जाने तेहिनाउँ ।
सातोंद्वीप नवो खंड, जुरे आय इक ठाँउँ ॥
धनिसुलतान जेहिक संसारा । वही कटके अस जुरी अपारा ॥
सबै तुर्क शिरताज वखोने । तबल बाज औ बांधे बाने ॥
लाखन मीर बहादुर जंगी । चित्रेँ कमानी तीर खदंगी २६ ॥
जीमा खोल रग सो मैढ़े । लेज़म घाल इराकेँहि चढ़े ॥
चमकै पखँरी सारिसँवारी । दरपण छाँहिअधिक उजियारी ॥
बरण बरण औ पाँतिहिंपाँती । चलीसो सेनाँ भाँतिहिंभाँती ॥
बीहर बीहरे सब की बोली । विधि ३२ यहिकहांकहांसोखोली ॥
दो० योजनैं सत ससकर, इक इक होय पयानैं ।
अगिलहिंजहांपयानहोय, पछिलहिंतहांमिलान ॥
डोले गढ़ गढ़पति सब कांपे । जीवन पेट हाथ हियेँ चांपे ॥
कांपा रनथंभौरेँ डर डोला । तरवैरेँ गयो भुराय तँबोला ॥
चूनागढ़ै औ चंपा तेरी ४१ । कांपा माँड़ो लेत चँदेरी ४२ ॥
नाम मुल्क १ से १६ तक पूर्व से पश्चिमतक २० सातों मुल्क २१ जगह
२२ फ़ौज २३ बयान २४ तसवीर २५ नामतीर २६ मूठ ताँत से मढ़ी २७
घोड़ा २८ निशान २६ ज्यादा ३० फ़ौज ३१ अलग ३२ ईश्वर ३३ कोस३४
कूच ३५ क़िलादार ३६ दिल ३७ नामक़िला ३८ पेंड ३६ नाममुल्क ४० से
४३ तक ॥