पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २३६
जहँ तहँ लीन्ह पलाने, कटकेँ¹ सुरहें² अस छूट ॥
चले सहसबेसक³ सुलतानी । तीपैंतुरंग⁴ बांक कनकानी ॥
पंखेरी चली जो पाँतिहिंपाँती । वरण वरण औ भाँतिहिंभाँती ॥
काँले कुँमेते नील संपेती । खिंगंकुरंगे बीजें²³ दोरें²⁴ कतीती²⁵ ॥
अवलकेँ¹⁶ अबरसे¹⁷ लँखीशिरौंजी । चौधैर चाचसमुँदसबताजी ॥
किरमर्जे²⁰ नुकरों²¹ जरदौ भले । रूपकगनै बोलसरै चले ॥
पँचकल्याने²² संजावै बखानी । महि²६ सायरसबंचुन²⁷आनी ॥
मुशँकी औहिरमँजी²⁹ इराँकी³० । तुरँकी³¹ कहीसुथौरे बुलौँकी ॥
दो० शिर औ पूँछ उठाये, चहुँदिशि श्वास उनाहिं ।
रोषे³³ भरे जस बावरे, पवन की बाँसेँ उड़ाहिं ॥
लोहे साँरे³५ हस्ति पहिराये । मेघश्याम³६ जनु गरजतआये ॥
मेघहि चाह अधिकै वैकारे । भयो अमूझ देख अँधियारे ॥
जस भादौ निशि³८ आवैदीठी । स्वँग जाय हरके तेहिपीठी ॥
सोरह लख हँस्ती जब चाला । परवत सरस चलै जग हाला ॥
चले गैंड़ माते मद आवहिं । भागहिंहस्ति⁴² गन्धजोपावहिं ॥
ऊपरजाय गगनै शिर घिसा । औ धर्ती तरिकहँ धस मंसा ॥
भा भूचाल चलत गजगानी । जहँ पग धरहिं उठै तहँ पानी ॥
दो० चलत हस्ति जगकाँपा, चाँपा शेष पतार ।
कूँर्म जे धर्ती ले रहा, बैठ भयो गजभार ॥
चले सो उमर अमीर बखाने । का बरणों जस उनके बाने ॥
फ़ौज १ टीड़ी २ हज़ार कुरसी ३. तेज़ घोड़ा ४ निशान ५ घोड़ों की
ज़ात ६ सें २५ तक सब दुनिया २६ घोड़े की ज़ात २७ से ३२ तक
गुस्सा ३३ डर ३४ भूल लोहे की ३५ हाथी ३६-४१-४२ कालें
बादल ३७ बहुत ३८ रात ३६ आसमान ४०-४३ कछुवा जिसके
ऊपर ज़मीन है ४४ ॥