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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 318 में से

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पृष्ठ 212

तजें नागेसर को वहि, जाउँ न तुहिं अँबराउँ ॥
तेहि अँबराउँ लीन्हकाजूरी। काहे भई नींब मुख मूरी॥
भई बेर कित कुटिल कटीली। तेंदू कीन्ह चाह बकसीली ॥
नारँगदारिख न तुम्हरी बारी। देखमराहिं जेहि सूगाँसारी ॥
औ न सदाफर तुरँज जँभीरा। कटहर बड़हर लौका खीरा ॥
कमल के हिरदय रोवां केसर। तोहू न सर पूजी नागेसर ॥
जहँकटहरकोउ बरहिं न पूँछी। बड़ पीपर का बोलहि छूछी॥
जो फल देखी सोई फीका। ताकर काह सरौहे नीका ॥
दो० रहु तू अपनी बारी, मोसों जूझ न बारू।
मालतिउपमन पूँजी, पुनि करखोजाखाज॥
जो कटहर बड़हर बड़बेरी। तोहिअसनाहिंजोकोकाबेरी ॥
श्यामजानमोर तुरँगजँभीरा। कडुइ नींब तू छाँह गँभीरा ॥
नरियर दारिखें बिही कहँ राखौं। गलगलजाउँसौतैं नहिंभाखों॥
तोरें कहे होय मोर काहा। फरे वृक्ष कोउ ढेल न बाहा ॥
वै सदाफर सो नित फरै। दाँड़िम देख फाटहिर्यै मरै ॥
जाफर लौंग सुपारि छुहारा। मिर्च होय जो सहै न पारा ॥
हौं सुपान रंग पूजन कोई। बिरह जो जरे चून जस होई ॥
दो० लाजहि बूड़ मरेसि नहिं, ऊभे उठावसबाँह ।
हौं रानी पिय राजा, तो कहँ योगी नाँह ॥
हौं पद्मिनी मानसरे कँवों। भँवर मराले करहिंमोरसेवा ॥

नागेसर छोड़ तेरेबाग न जाऊँ १ बाग २ मुक़ाबिले ३ नींव ऐसी
कडुवी ४ बैंगन जंगली से बेर कांटादार अच्छाहोगा ५ अंगूर ६ तोता
मैना ७ दिल ८ बराबर ६ कटहर वलंद १० तारीफ़ ११ बराबर १२ अंगूर
इसी वास्ते रक्खा है १३ सौतका मुँह से नाम न लों १४अनार १५छाती १६
खाविंद के बिरह में जलके चूना हुई १७ वलन्द १८ खाविन्द १६ नाम
तालाव २० कमल २१ हंस २२ ॥