पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१० पद्मावत ।
जस सेवंती गुलाल चमेली । तैसि एकजन वहू अकेली ॥
दो० अब सुदरशनें गूजा, तब सतें वरगै योग ।
मिला भँवर नागेसरसेते, वही देहि सुखभोग ॥
सुनि पद्मावत रिस न सँभारी । सखिनसाथ आई फुलवारी ॥
दोउ सौत मिल पाटें जो बैठी । हियविरोधे मुख बातें मीठी ॥
बारीहँटि सो रँग सो आई । पद्मावत हँस बात चलाई ॥
बारी सुफल अहै तुम रानी । है लाई पै लाय न जानी ॥
नागेसर औ मालति जहां । सुगन्धराव नहिं चाही तहां ॥
रहा जो मधुकर कमल पिरीता । लाग्यो जाय करीलकी रीता ॥
जहँ इमली बांकी हियँ माहाँ । तहँ न भाव नारँगकीछाहाँ ॥
दो० फलहि फूलके फरजहां, देखहु मनहिं विचार ।
अम्ब लाग जेहि बारी, चम्प लाग तेहिबार ॥
अनतुम कही नीक यह शोभा । पै फलसोई भँवर जेहिलोभा ॥
श्यामै जाम्ब कस्तूरी चोवा । अम्बजोऊँच हृदय तेहिरोवा ॥
तेहिगुन असभइ जाम्बनेवारी । लाई आन मांझ केवारी ॥
जल बाढै वहिया जो आई । है वांकी इमली शिर नाई ॥
तु कस पराई बारी दोखी । तैंजे पानि धावहु मुख सूखी ॥
उठै आग दोउ डार अभैरा । कौन साथ तुहिं वैरी केरा ॥
जों देखी नागेसर बारी । लाग मरी अब सूगाँसारी ॥
दो० जो सरवरै जल बाढ़े, रहै सो अपनी ठाउँ ।
तथा नागमती वा राजा १ तथा पद्मावत २ तख्त ३ दुश्मनी ४ फुल-
वारी खुशरंग देख ५ भँवर कमलका आशिक़ ६ दिल ७-६ कालीजामुन ८
मुश्क ८ जो मैं जवाबदौं तौ पानी छोड़दो और मुँह सूखजाय १० जो मेरे
बागको नागेसर देखे ११ तोता मैना १२ तालाब १३ ॥