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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 188

पद्मावत । १८७
दो० लिखनी लाग जो लेखा, कहे न पारहिं जोर।
अर्ब खर्ब औ नीलशंख, साहस पदम करोर ॥
देख दर्व राजा गर्बानौ । दृष्टि मांहि कोइ और न आनौ ॥
जो मैं होब समुद्र के पारा । को है मोहिं जगत संसारा ॥
दर्व गर्व लोभ विष मूरी। दत्ते न रहे सत्ते हो दूरी ॥
दत्त सत्य पै दोनों भाई। दत्त न रहै सत्य पुनि जाई ॥
जहां लोभ तहँ पाप सँघाती । संचै मरै आनकी थाती ॥
सिद्धं दर्व आगके थापा । कोई जरा जार कोइ तापा ॥
काहू चांद काहुभा राहू । काहू अमृत विष भा काहू ॥
दो० तस भूला मन राजा, लोभ पाप अँधकूप।
आय समुद्र ठाढभा, है दानी के रूप ॥
वोहितं भरी चला लै रानी। दान मांग संंतदेखी दानी ॥
लोभ न कीजे दीजे दानू। दानहि पुण्यहोय कल्यानू ॥
दर्व दान देई विधि कहा। दान मोक्ष है दुख नहिं रहा ॥
दान आहि सब द्रव्यकि जँरू। दान लाभ है बाँचै मूरू ॥
दान करै रक्षा मँझ नीरा। दान गहे लै लावै तीरा ॥
दान करन दै दुइ जगतरा। रावन सँचौ अगिनिमहँजरा ॥
दानमेरु बड़ लाग अकांराँ। सेंतैं कुबेर बूड मँझधारा ॥
दो० चालिस अंश द्रव्य जहँ, एक अंश तहँ मोर।
नाहिंत जरै कि बूडै, की निशँ मूसहिं चोर ॥
सुनि सुदान राजै रिसमानी। कै वोरायस बौरे दानी ॥
गरूर किया १ निगाह २ बराबर ३ देना ४ सचाई ५ जोड़ना ६ साधू
७ अन्धाकुवां ८ नाव ६ दान देनेवाला १० भलाई ११ ईश्वर १२ नजात १३
न्योछावर १४ असिल जमा १५ पानी में वंचावै १६ नाम राजा १७ जोड़ना
१८ नाम पहाड़ १६ आसमान २० जमा करना २१ रात २२॥