पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८४ पद्मावत ।
राहु चन्द्र भूमि संपति आये । चन्द्रग्रहण तब लाग संजाये ॥
सुनि काजग आज्ञा लीजे । सिद्धि योग गुरपरवा कीजे ॥
दो० जेहि नक्षत्रहोय रवि, वही अमावस होय ।
वीचि परेवा जब मिले, सूर्यग्रहण तब होय ॥
चलहुचलहु भा पियँकरचालू । घड़ी न देखलेत जिवकालू ॥
समुदलोक धर्न चढ़ी वेवाना । जोदिनडरे सो आयतुलानाँ ॥
रोवहिं मात पिता औ भाई । कोउ न टेकै जो कंत चलाई ॥
रोवहिं सब नैहर सिंहला । लै बजाय के राजा चला ॥
तजाँ राज रावनका गयो । छांड़ा लंक विभीषण लियो ॥
फिरी सखी भेंट तज फेरा । अन्त कन्त सो भयो गुरेराँ ॥
कोइ काहू का नाहिं नियानों । मया मोह बांधा उरमानो ॥
दो० कञ्चनकायों नाँरिकी, रही न तोला मांस ।
कन्त कसौटी घालके, चूरौं गढ़ै कि हांस ॥
जो पहुँचाय फिरा सब कोऊ । चलासाथगुनअवगुनँ दोऊ ॥
औ सँगचला गवन सबसाजा । वही दई अस पारेराजा ॥
डोली सहस चलीसँग चेरी । सबै पद्मिनी सिंहल केरी ॥
भल पटोरे खर वार सँवारी । लाख चारइक भरी पेटारी ॥
रतनपदारथ माणिक मोती । काढ़ भंडार दीन्ह रथजोती ॥
परख सो रतन पारखेंहि कहा । इकइकनग सृष्टिबरँ लहा ॥
सहस पांति तुरयनँ की चली । औसौपांति हस्ति सिंहली ॥
ज़मीन १ श्वास का विचार २ सूर्य ३ रत्नसेन ४ मौत ५ पद्मावत ६
पहुँचा ७ रोकना ८ छोड़ना ६ मुलाकात १० आखिर ११ सोने की तरह
बदन १२ पद्मावत १३ नाम जेवर १४ पाप और पुण्य १५ ईश्वर पार ल-
गावै १६ हज़ार डोली लौंडी १७ कपड़ा १८ छात १६ हीरा जवाहर २०
जौहरी २१ सारी दुनिया की क़ीमत २२ हज़ार क़तार घोड़ा २३ हाथी २४॥