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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 184

पद्मावत । १८३
दो० चालनकहँ हम अवतरी, चलन सिखात हँ आय ।
अब सो चलन चलावै, को राखै गहिपायँ ॥
तुम बारी पिय सोर के राजा । गर्ब क्रोध वोही पै छाजा ॥
सब फल फूल वही की शाखा। चहै सो तोड़े चहै सो राखा ॥
आयसु लहे रहो नित हाथा। सेवा करहु लाय भुइँ माथा ॥
बर पीपर शिरउभै जो कीन्हा । पाकर तिन सूखी फर दीन्हा ॥
बंवर बोड़ शीश भुइँ लावा । बड़फल सुफर वही पै पावा ॥
आँव जो फरके नवै तराहीं । तब अमृतभा सब उपराहीं ॥
सोइ पियारी पियाहिँ पिरीती । रहै जो आयसुँ सेवा जीती ॥
दो० पोथीकाढ़ गवन दिन देखे, कौने दिन है चाल ।
दिशाशूल औ वक्रयोगिनी, सौहंन चलिये काल॥
अदिते शुक्रपश्चिमदिश राहू । बेफै दक्षिण लंकदिशे दाहू ॥
सोमैँ शनीचर पूरुब न चालू । मंगर बुद्ध उत्तरदिश कालू ॥
आवशैं चला चहै जो कोई । औषधि कहूँ रोग नहिं होई ॥
मङ्गल चलत मेल मुखधनियां। चलै सोम देखें दरपनियां ॥
शुकहिं चलत मेल मुखराई। बेफै चलै दक्षिण गुड़ खाई ॥
अदित तंबोल मेल मुखगुण्डी। बायबरंग शनीचर खण्डी ॥
बुधदधि किये चलहुभोजना । औषधि यहि न आनखोजना॥
दो० अवसुनि चक्र योगिनी, ते भुइँ थिरै न रहाहिं ।
तीसोदिनँ सचन्द्रमा, आठो दिशा फिराहिं ॥
बारह उनइस चार सताइस । योगिनपच्छमदिशा गिनाइस॥
पैदा १ पैरपकड़के २ राजाभोज ३ गुरूर ४ हुक्म ५-६ बलन्द ६ कद ७
शिर ८ सामने १० इतवार ११ उत्तर तरफ़ १२ सोमवार १३ ज़रूरत १४
दही १५ क़ायम १६ दिन १७ ॥